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खर्च में तेजी पड़ी भारी,96 पंचायतें जांच के घेरे में

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गोंडा। पंचायतों में विकास के साथ ही श्रमिकों को रोजगार देने के लिए संचालित मनरेगा से जुड़े कार्यों में भुगतान की मनमानी जॉब कार्डधारकों पर भारी पड़ रही है। कुछ पंचायतों में मनरेगा बजट के खर्च में जहां अनावश्यक तेजी दिख रही है तो वही अधिकांश अन्य में श्रमिकों के भुगतान में देरी परेशान कर रही है। बजट खर्च में अनावश्यक तेजी दिखाने वाली 96 पंचायतों को चिह्नित कर उनकी जांच का निर्देश सीडीओ ने दिया है। जांच के दौरान भुगतान की प्रक्रिया के साथ ही योजना के तहत कराए गए कार्यों का स्थलीय सत्यापन भी होगा। इसके लिए 16 ब्लॉकों में जांच के लिए तकनीकी अधिकारियों के साथ ही जिला स्तरीय अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित हुई है।
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दूसरी तरफ कई पंचायतों में समय पर मजदूरी का भुगतान न होने से मनरेगा से जुड़े श्रमिकों का मोह भी अब योजना से जुड़े कार्यों से भंग होने लगा है। रोजगार की तलाश में उन्हें गांवों से पलायन तक को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में देर से भुगतान करने वाली पंचायतों से जुड़े जिम्मेदारों से लिखित जवाब तलब किया जा रहा है। इनमें से अधिकांश पंचायतें पांच ब्लॉक क्षेत्र की बतायी जा रही हैं। श्रमिकों को देर से भुगतान करने में विकास खंडों मुजेहना, पंड़रीकृपाल, मनकापुर, झंझरी, तरबगंज की पंचायतों में छानबीन हो रही है। मनरेगा से अब तक 80 करोड़ के करीब का भुगतान श्रमिकों को किया गया है। जिसमें 16 करोड़ से अधिक का भुगतान करने में एक से लेकर दो माह तक की देरी बरती गई है।
मनरेगा खर्चों की शुरुआती निगरानी में सामने आया है कि 96 पंचायतों में मनरेगा से आवंटित बजट खर्च करने में काफी तेजी दिखाई गई है। इस दौरान श्रम व सामग्री खरीद के साथ ही प्रशासनिक मद में भी निर्धारित मानक से अधिक पैसा खर्च किया गया। अब जांच के लिए प्रत्येक ब्लॉक की छह- छह पंचायतों को चिह्नित कर कार्रवाई शुरू हुई है। सीडीओ गौरव कुमार ने बताया कि जांच के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को ब्लॉकवार जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच के घेरे में परसपुर की पसका, मरचौर, नंदौर के साथ ही बभनजोत की सैदपुर, केशव नगरग्रंट, दौलपुरग्रंट समेत अन्य ग्राम पंचायतें हैं। इस दौरान नामित अधिकारी कार्य स्थल का सत्यापन कर मजदूरी भुगतान से जुड़े सभी पहलुओं की छानबीन करेंगे।
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अनियमित भुगतान में फंसी थी 35 पंचायतें
वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी मनरेगा में नियमों की अनदेखी करके 35 ग्राम पंचायतों में 2.64 करोड़ का अनियमित भुगतान का मामला सामने आया था। इसमें वजीरगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत सामग्री मद में निर्धारित मानक से अधिक धनराशि खर्च की गई थी। कार्रवाई के घेरे में आई पंचायतों में महादेवा, भरहापारा, डुमरियाडीह, जमुनहा मझरेती, खीरीडीह, हरिहरपुर, बेइलिया, रमचेरापुर, बभनी, करौंदा, खानपुर, बल्लीपुर, बिरहमतपुर, कोठा, डल्लापुर, नगवा, बेलभरिया, सोहना, अचलपुर, बंधवा, रसूलपुर, पेड़राही, वजीरगंज, उदयपुरग्रंट, ढोढ़ियापारा, गनेशपुरग्रंट, अनभुला, मझगवां, अशोकपुर खोखिया, नियामतपुर, धनेसरपुर, करदा, परसापुर महड़ौर, चढ़ौवा व कोयलीजंगल समेत अन्य पंचायतें भी शामिल थी।
प्रशासनिक मद में खर्च कर दिए 8.11 करोड़
मनरेगा योजना के तहत संचालित कार्यों में 60 प्रतिशत धनराशि श्रम व 40 प्रतिशत सामग्री मद में खर्च की जाती है। कुल खर्च के सापेक्ष चार प्रतिशत धनराशि प्रशासनिक मद में खर्च करने के निर्देश हैं। उक्त धनराशि से कर्मियों को मानदेय भुगतान, वाहन किराया, ईंधन व अन्य खर्च होते हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा में 116.05 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। जांच में सामने आया था कि प्रशासनिक मद में ब्लॉक स्तर पर 5.90 करोड़ के खर्च की स्वीकृति दी गई थी लेकिन प्रधानों व अफसरों की साठगांठ से 8.11 करोड़ की राशि खर्च कर दी गई। इस तरह 12 ब्लॉकों में 2.64 करोड़ रुपया का अनियमित भुगतान हुआ था।
मनरेगा योजना की पूरी निगरानी की जा रही है, श्रमिकों को रोजगार देने के लिए प्राथमिकता पर कार्य कराया जा रहा है। गड़बड़ी करने वालों को चिन्हित करके कार्रवाई को निर्देशित किया गया है। डॉ. उज्जवल कुमार, जिलाधिकारी
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