गोंडा। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जनपद व गैर जनपद के लगभग 200 फर्जी वसीयतों व बैनामों के पंजीकरण मामले में निलंबित किए उपनिबंधक सौरभ कुमार सिंह को राहत नहीं दी। कोर्ट ने आरोप पत्र व विभागीय जांच के खिलाफ दायर उनकी याचिका को खारिज कर मामले में जांच कर रही कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा है। इधर, आईजी निबंधन के आदेश पर विभागीय अफसर पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।
आजमगढ़ जनपद के सिधारी थाने के ग्राम बैठोली निवासी रिंकी सिंह के मुख्तार आम प्रशांत प्रकाश सिंह की शिकायत पर तत्कालीन महानिरीक्षक निबंधन एवं स्टांप इलाहाबाद डॉ. रोशन जैकब ने उपमहानिरीक्षक देवीपाटन मंडल डॉ. दिनेश प्रसाद मिश्र, सहायक महानिरीक्षक बहराइच सिद्धार्थ कुमार और सहायक महानिरीक्षक बलरामपुर की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर प्रारंभिक जांच कराई। जांच में पता चला कि उपनिबंधक कार्यालय के कनिष्ठ सहायक व तत्कालीन प्रभारी उपनिबंधक सौरभ सिंह ने नियम के विपरीत वसीयतनामे का पंजीकरण किया। कमेटी की रिपोर्ट पर आईजी ने प्रभारी उपनिबंधक को निलंबित कर उन्हें डीआईजी निबंधन एवं स्टांप प्रयागराज कार्यालय से संबद्ध कर दिया।
इधर, निलंबन के बाद चल रही विभागीय कार्यवाही को रोकने की मांग करते हुए सौरभ सिंह ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान अदालत ने उनकी मांग ठुकराते हुए कहा कि विभागीय कार्यवाही में जांच टीम आरोपों की सत्यता की पड़ताल कर रही है और इस दौरान आरोपी सरकारी सेवक अपना पक्ष जांच अधिकारी के समक्ष रख सकता है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी।