गोंडा। शारदीय नवरात्र को लेकर रविवार को देवी मंदिरों में तैयारियां की गईं हैं। साफ-सफाई कर मंदिरों को फूलों से सजाया गया है। प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों की सुरक्षा के लिए स्वयंसेवकों व आवश्यक पुलिस बल की व्यवस्था की गई है। सोमवार से शुरू हो रहे नवरात्र के लिए खरीददारी करने वालों से बाजार गुलजार रहा।
रविवार को आंबेडकर चौराहा, चौक बाजार, रानी बाजार, ददुआ बाजार व में नारियल, चुनरी, फल, कलश, मूंगफली दाना, साबूदाना आदि व्रत सामग्री खरीदने वालों का तांता लगा रहा। बढ़ती मांग को देखते हुए दुकानदारों ने व्रत सामग्रियों के दाम बढ़ा दिए। फलों के दाम करीब 20 फीसदी तक बढ़ गए। कुट्टू का आटा, मूंगफली के तेल, साबूदाना आदि के दामों में इजाफा हुआ। सोमवार से जिला भक्तिमय हो जाएगा। भोर से ही देवी मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलेगी। कोरोना संक्रमण काल के बाद फिर नवरात्र में मां भक्तों का उत्साह देखने को मिलेगा। शहर से सटे खैराबाग गांव के पास स्थित खैरा भवानी मंदिर में भोर सुबह से देवी भक्तों का तांता लग जाता है।
नवरात्र में नौ दिनों तक यहां मेला लगा रहता है, देर शाम तक भक्त मां खैरा भवानी के दर्शन कर अपनी मुुराद मांगते हैं। शहर के काली भवानी मंदिर, उमरी बेगमगंज स्थित बाराही माता मंदिर सहित जिले के करीब दो दर्जन देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। जिला प्रशासन ने मंदिर समिति के साथ मिलकर तैयारियां पूरी कर ली हैं।
देवी प्रतिमाओं से गुलजार होंगे पंडाल
शहर से लेकर गांवों तक में नवरात्र की तैयारी पूरी कर ली गई है। घरों में मां का कलश स्थापित कर नौ दिनों तक पूजन अर्चन किया जाएगा। शहर से लेकर गांवों तक में पंडाल तैयार कर मां की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी हो रही है। शहर के अलावा करनैलगंज, बालपुर, इटियाथोक, तरबगंज, मनकापुर, परसपुर समेत अन्य स्थानों पर 1900 पंडाल बनाए जाएंगे।
घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
सोमवार को शारदीय नवरात्र का शुभारंभ घट स्थापना के साथ होगा। काजीदेवर निवासी पंडित राकेश दत्त शास्त्री के अनुसार सोमवार सुबह 6.28 बजे से लेकर 8.01 तक घट स्थापना करने का सबसे अच्छा मुहूर्त है। घट स्थापना के लिए कलश को गंगाजल युक्त जल से भरें, कलश के मुंख पर आम या अशोक की पत्तियां लगाएं तथा ऊपर नारियल रखकर लाल कपड़ा से लपेटकर नारियल से बांधे। कलश में मिट्टी के सहारे जौ के बीज बोएं तथा हर रोज पानी का छिड़काव करें।
नवरात्र के लिए प्रमुख व्रत सामग्री का भाव
नारियल- 40 रुपया प्रति नग
कलश- 45 रुपया प्रति नग
चुनरी- 10 से 15रुपया पीस
सेब 80 रुपया किलो
केला- 45 रुपया दर्जन
अनार- 80 रुपये किलो
कुट्टू आटा- 100 रुपये किलो
रामदाना- 100 रुपये किलो
मूंगफली दाने- 130 रुपये किलो
साबुतदाना- 80 रुपये किलो
तर्पण व पिंडदान के साथ पितृ विसर्जन
एक पखवाड़ा तक चले पितृपक्ष के बाद रविवार को तर्पण व पिंडदान के साथ पितृ विसर्जन के साथ पूर्वजों को विदाई दी गई। सनातन मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में कुल खानदान के मृतक व्यक्ति की आत्मा पृथ्वी पर आती है, जिन्हे प्रसंन्न करने के लिए पूजन व श्राद्ध किया जाता है। विगत 15 दिनों से चल रहे पितृपक्ष के बाद पिंडदान व ब्राह्मण भोज के साथ पूर्वजों को विदाई दी गई, जिससे वह तृप्त होकर पुन: स्वर्ग लोक चले गए।