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7.85 करोड़ से 357 परिषदीय स्कूल होंगे स्मार्ट

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गोंडा। जिले के 357 परिषदीय स्कूलों में 7.85 करोड़ रुपये से स्मार्ट क्लास तैयार किए जाएंगे। इस प्रक्रिया से करीब 50 हजार बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। इसकी स्वीकृति हो गई है और इसी साल परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास संचालित होंगे।
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परिषदीय स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई को स्मार्ट बनाने के लिए डिजिटल कंटेंट के जरिए स्मार्ट क्लास रूम तैयार किए जाएंगे। इसके लिए शिक्षकों को भी डिजिटल लर्निंग के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि वे ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए पढ़ाई के स्तर को निखार सकें। निपुण भारत अभियान के तहत प्राइमरी और उच्च प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के लिए दीक्षा एप समेत कई अन्य माध्यमों को तैयार किया गया है।
इसमें चयनित प्रत्येक स्कूल पर 2.20 लाख रुपये का बजट शासन खर्च करेगी। क्लास रूम को स्मार्ट बनाने के लिए छह माह से डिजिटल लर्निंग से शिक्षकों को जोड़ा जा चुका है। साथ ही दीक्षा एप के माध्यम से टेक्स्ट बुक और टीचिंग मैनुअल उपलब्ध कराए गए हैं। इसके जरिए 6500 से ज्यादा वीडियो कंटेंट के जरिए बच्चों को क्लासरूम में पढ़ाया गया है। स्कूलों में प्रोजेक्टर और कंप्यूटर की व्यवस्था होगी। (संवाद)
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शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण
बच्चों की रीडिंग स्किल को बेहतर बनाने के लिए रीड एलॉन्ग एप शुरू किया गया है। इस एप से शिक्षकों के साथ अभिभावकों को जोड़ा जा रहा है। निपुण भारत मिशन से शिक्षकों को तकनीक का उपयोग कर शैक्षिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण पा चुके शिक्षक अपने विद्यालयों में दीक्षा एप व अन्य डिजिटल माध्यमों से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। यही नहीं, शिक्षक संकुल के नाम से पहचाने जाने वाले नोडल शिक्षक भी माह में एक बार बैठक करके शिक्षकों को शिक्षण के बेहतर तरीकों की जानकारी देंगे।
तीन स्तर से होगी निगरानी
स्मार्ट स्कूल का संचालन शुरू होने के बाद डिजिटल लर्निंग के स्तर की तीन स्तरों पर निगरानी होगी। पहली स्पॉट पर जाकर, दूसरी तिमाही समीक्षा के जरिए और तीसरी थर्ड पार्टी के माध्यम से स्थिति को परखा जाएगा। निपुण भारत मॉनीटरिंग सेंटर के जरिए छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का स्तर देखा जाता है। निपुण तालिका, निपुण सूची और निपुण लक्ष्य के जरिए भी प्रत्येक स्कूल की निगरानी होगी। इसके जरिए लक्ष्य रखा गया है कि कक्षा तीन तक के छात्र अनुच्छेद को 60 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह से पढ़ सकें और 75 प्रतिशत तक प्रश्नों को सही हल कर सकें।
शासन ने जिले के 357 स्कूलों को स्मार्ट बनाने की योजना में शामिल किया है। स्मार्ट स्कूल योजना शुरू होने से शैक्षिक व्यवस्था हाईटेक तो बनेगी ही, छात्रों को बेहतर शिक्षा मिलेगी।
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अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए
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