गोंडा से बहराइच के बीच रेल यातायात नवंबर के आखिरी सप्ताह से आठ महीने के लिए बंद हो जाएगा। इससे गोंडा, बहराइच सहित अन्य जनपदों के लोग ट्रेन से बहराइच नहीं आ-जा सकेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले रेल बजट में मोदी सरकार ने गोंडा-बहराइच छोटी लाइन के बड़ी लाइन में अमान परिवर्तन किए जाने की स्वीकृति दी थी।
इसका काम दो महीने बाद नवंबर के आखिरी सप्ताह से शुरू हो जाएगा। गोंडा-बहराइच के रेल इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब 95 साल बाद किसी रेल ट्रैक का आवागमन इतने दिनों के लिए बंद होगा। साथ ही गोंडा से निकलने वाली छोटी लाइन का वजूद खत्म हो जाएगा।
गोंडा-बहराइच के बीच ट्रेन चलाए जाने की शुरूआत 95 साल पहले ब्रिटिश शासनकाल में सन 1920 में हुई थी। जबकि गोंडा का रेल इतिहास इससे 38 साल और पुराना है। यहां सन 1882 में रेलवे स्टेशन की स्थापना हुई थी। उस समय गोंडा से छपरा होते हुए आसाम तक ट्रेनों का संचालन होता था।
इसके बाद सन 1920 में पहली बार गोंडा से बहराइच के बीच ट्रेनाें का संचालन शुरू किया गया। गोंडा से बहराइच तक ट्रेन जाती थी, लेकिन उसका विस्तार पड़ोसी देश नेपालगंज व मैलानी तक कर दिया गया।
मौजूदा समय गोंडा-बहराइच छोटी लाइन पर गोंडा से 9 जोड़ी ट्रेनों का संचालन होता है, जिसमें एक ट्रेन गोकुल एक्सप्रेस भी शामिल है, जिससे हर रोज हजारों श्रद्धालु उत्तराखंड स्थित मां पूर्णागिरि की यात्रा करते हैं। लेकिन नवंबर में गोंडा से बहराइच के बीच रेल यातायात बंद हो जाने पर मां पूर्णागिरि सहित अन्य स्थानों तक जाने के लिए यात्रियों को बस का सहारा लेना पड़ेगा।
नवंबर के आखिरी सप्ताह से रेल महकमा गोंडा-बहराइच के बीच बिछी छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित करने का काम शुरू कर देगा। जिससे न सिर्फ पांच हजार यात्रियों की मुश्किलें बढ़ेंगीं, बल्कि इससे हर दिन प्राप्त होने वाली 60 हजार रुपये रेल की आय भी प्रभावित होगी।
72 साल तक अनवरत स्टीम इंजन के संचालन के बाद वर्ष 1992 में इसे बंद कर दिया गया और उसके स्थान पर डीजल इंजन का प्रयोग होने लगा। करीब 23 साल से संचालित डीजल इंजन का वर्जन बदल जाएगा। अमान परिवर्तन होने के बाद छोटी लाइन पर चलने वाले डीजल इंजन भी बंद हो जाएंगे।
वहीं स्टीम इंजन को संरक्षित रखने के लिए एक इंजन स्टेशन के बाहर रखा गया है, जिससे लोग उसके इतिहास के बारे में जानकारी कर सकें। स्टीम इंजन का संचालन ड्राइवर के साथ एक फायर मैन भी करता रहा, जो सब्बल से कोयले को इंजन की भट्ठी में डालता था। अब तो फायरमैन की पोस्ट भी खत्म कर दी गई है।
पिछले रेल बजट में मोदी सरकार ने गोंडा-बहराइच छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित किए जाने के लिए इसका बजट पास किया था। इसके क्रम में 61 किलोमीटर छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तित किया जाना है। इसका काम वैसे तो अक्तूबर में ही शुरू हो जाता, लेकिन किन्हीं कारणों से अब इसके काम की शुरूआत नवंबर के आखिरी सप्ताह से होगी। 240 दिनों के भीतर इसका काम पूरा होने की उम्मीद है। - आलोक सिंह, मंडल रेल प्रबंधक