बीते 24 घंटे में घाघरा नदी का जलस्तर 8 सेमी बढने के बाद खतरे के निशान 106.07 से 106.296 पर जाकर स्थिर हो गया है। मंगलवार शाम घाघरा नदी खतरे के निशान से 14 सेमी ऊपर थी। जिसके चलते शाम से ही बाढ़ का पानी करनैलगंज इलाके मे फैलना शुरू हो गया था।
शाम तक इसके पानी से 20 नए गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। इससे अब करीब 80 गांव घाघरा की चपेट में आ गए हैं। इसे देखते हुए बचाव व राहत कार्य प्रशासन की ओर से तेज कर दिया गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर से परेशान प्रशासन ने बुधवार को कई गांवों में घूम कर बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना और उन्हें राहत सामग्री मुहैया कराई।
करनैलगंज इलाके में पिछले साल कटा हुआ बंधा यहां के लोगों के लिए इस कदर मुसीबत खड़ा कर देगा। यह बात न तो यहां लोग जानते थे, न ही प्रशासन। मंगलवार को जैसे-जैसे नदी का जलस्तर बढ़ता गया, वैसे-वैसे नए-नए मजरे इसके पानी की चपेट में आते चले गए।
अभी तक इस इलाके में 6 गांवों के 60 गांवों तक ही बाढ़ का पानी फैला था। लेकिन बीते 24 घंटों में जिस तरह से घाघरा का जलस्तर बढ़ा, उससे 20 नए गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। जिसमें नदी किनारे बसे नकहरा, घरकुईंया और अतरसुईयां के कुछ मजरों में बाढ़ का पानी कमर के ऊपर बह रहा है। यहां रहने वाले लोगों की झोपडिय़ा पूरी तरह से बाढ़ के पानी में डूबी हुई हैं। वहीं नदी की तेज धार से बहकर आने वाले पानी में कईयों के झोपड़े तक उजड़ गए हैं।
बुधवार को घाघरा नदी के पानी ने जगजीवन प्रधान पुरवा, गोडियनपुरवा, पछुवनपुरवा, बगुलिहन पुरवा, दुलारे पुरवा, इकबाल प्रधान पुरवा, छंगूपुुरवा, संभरपुरवा, मछवारनपुरवा, पुलिनपुरवा, तीरथरामपुरवा, देवकिशनपुरवा, भगतपुरवा सहित 7 अन्य गांव में अपनी दस्तक दी।
जिसके बाद इन मजरों में रहने वाले लोग अपना घर-बार छोड़ सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे हैं। वहीं अतरसुईयां प्राथमिक विद्यालय तक भी बाढ़ के पानी ने अपनी दस्तक दे दी है। बुधवार को विद्यालय में बाढ़ का पानी घुस आया। जिससे विद्यालय को बंद करना पड़ा। नदी के जलस्तर में हो रही बढ़ोत्तरी के मद्देनजर बुधवार को जिलाधिकारी जेबी सिंह व पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार सिंह ने नाव से बाढ़ प्रभावित मजरों का दौरा किया और बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना।
दो दिन पहले गिरिजा बैराज से 1.07 लाख तो शारदा बैराज से 68 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से घाघरा नदी के जलस्तर में 39 सेमी की बढ़ोत्तरी हुई है। हालांकि बुधवार शाम खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर जाकर घाघरा स्थिर हो गई है। जिससे उम्मीद है कि नदी का पानी अगले कुछ घंटों में घटना शुरू हो जाएगा।
घाघरा नदी की खासियत है कि जब नदी का पानी कम होता है, तो इससे होने वाली कटान बढ़ जाता है। नदी का पानी किनारे तकरीबन 10 से 15 मीटर की गहराई में जाकर पूरी जमीन को मथने लगता है। जिससे ऊपर का हिस्सा दरार लेकर बैठ जाता है। वहीं रह-रह कर नदी में उठने वाले मसीने से भी बाढ़ के कटने का खतरा रहता है। एल्गिन-चरसड़ी बांध के काफी हिस्से को घाघरा अब तक काट चुकी है। ऐसे में नदी का जलस्तर घटने से बंधे की कटान का खतरा फिर से तेज होने की संभावना है।
बाढ से प्रभावित गांवों में रहने वाली 36 प्रसूता महिलाओं के साथ ही 40 बच्चों की परवरिश बाढ़ का खतरा बरकरार रहने तक सीएचसी मे होगी। महिलाओं को गांव से बाहर ले जाकर उनका सुरक्षित प्रसव कराया जाएगा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेेट/एसडीएम अर्चना वर्मा ने बाढ़ क्षेत्र में रह रही महिलाओं के लिए यह व्यवस्था की है।
ताकि उनके साथ उनके बच्चों पर बाढ़ की किसी आपदा से न जूझना पड़े। एसडीएम ने बाढ क्षेत्र के गांव नकहरा, काशीपुर, गौरासिंहपुर, प्रतापपुर, घरकुंइया, बहुवन मदार मांझा, दिवली सहित अनय गांवों में रह रही गर्भवती महिलाओं का डाटा तैयार कराया हैं जिन्हें गांव से बाहर ले जाकर डिलीवरी की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।