करनैलगंज (गोंडा)। घाघरा नदी खतरे के निशान को पार करते हुए तीन सेंटी मीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर में बढ़ोत्तरी से करनैलगंज तहसील के 7 ग्राम पंचायतों की 35 हजार की आबादी गांव -घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की खोज में निकल गई हैं।
परसवाल व कमियार गांव के स्कूलों में प्रभावित ने अपना डेरा बनाया है, इसके अलावा बड़ी संख्या में बाढ़ प्रभावितों ने बंधे पर ही अपना ठिकाना बना लिया। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र की 27 बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है।
करनैलगंज तहसील के नदी के तटवर्ती व बांध के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। परसावल, बेहटा, नएपुरवा, कमियार, माझा रायपुर, बहुवन माझा दक्षिणी, नकहरा आंशिक में बाढ़ की चपेट में हैं। इन गांवों के करीब 35 हजार की आबादी बाढ़ की समस्या से घिर गई है।
बड़ी संख्या में लोग परसावल व कमियार के स्कूलों में तो रुके ही हैं बांध पर भी अपना ठिकाना बना लिया है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं तो गांवों में भी काफी लोग रुके हुए हैं। प्रशासन बाढ़ चौकियों को सर्तक तो कर दिया है लेकिन अभी पर्याप्त सुविधा नहीं हो पाई है।
लोगों को खाने-पीने के सामानों के लिए इंतजाम करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि तहसील प्रशासन अभी बाढ़ के स्थिति की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि अभी जलस्तर इस स्थिति में नहीं है कि घरों को नुकसान कर सके। वहीं बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पानी भर जाने से गांवों में रुकना संभव नहीं है।
ऊंचे स्थानों पर ही व्यवस्था ही जानी चाहिए। भोजन का इंतजाम कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। इस तरह 35 हजार की आबादी के सामने कई तरह की समस्या शुरू हो गई है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों ने बाढ़ की स्थिति पर नजर तो रखनी शुरू कर दी है लेकिन प्रभावितों तक मदद पहुंचाने में पसीने छूट रहे हैं।