गोंडा के करनैलगंज के नकहरा में बाढ़ से घिरे घर।
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करनैलगंज (गोंडा)। घाघरा नदी का जलस्तर 24 घंटे में करीब एक फिट घट कर खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर नीचे आ गया। रविवार को केंद्रीय जल आयोग एल्गिन ब्रिज घाघराघाट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नदी का जल स्तर 105.946 रह गया। तो वहीं अब घाघरा से जुड़े बैराजों शारदा, गिरिजा व सरयू का कुल डिस्चार्ज मात्र 67 हजार 250 क्यूसेक रह गया है।
जलस्तर में आई इस कमी से बाढ़ प्रभावित गांवों में रह रहे लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। बरसात ने बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। महीने भर से पानी से घिरे कच्चे घरों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। बांध पर शरण लिए बाढ़ पीड़ितों को भी कोई मदद नहीं मिल रही है। घाघरा नदी महीने भर से खतरे के निशान के आसपास बनी हुई है। नदी का जल स्तर कभी ऊपर तो कभी नीचे होने का क्रम लगातार जारी है। इसके चलते गोंडा व बाराबंकी जिले के सरहदी इलाके सहित एल्गिन चरसड़ी बांध के तटवर्ती इलाकों पर बाढ़ का खतरा बरकरार है। मौजूदा समय में दोनों जनपदों के दर्जनों मजरे घाघरा का प्रकोप झेल रहे है। अकेले करनैलगंज इलाके के नकहरा गांव के करीब 9 मजरे पूरी तरह से घाघरा के बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं। तो वहीं बाराबंकी जनपद के बेहटा, मांझारायपुर, नैपुरा, परसावल सहित कई अन्य गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
सबसे खराब स्थिति तो बांध व नदी के बीच बसे गांवों नकहरा, मांझारायपुर, बेहटा, नैपुरा व परसावल की है। इन गांवों के लोग करीब एक माह से रिंगबांध व एल्गिन चरसड़ी बांध पर शरण लिए हुए हैं। बांध पर गुजारा कर रहे लोगों का कहना है कि गांव में उनके छप्पर के घर पानी लगने के कारण गिर गए हैं। यहां रहने वालों को प्रशासन कोई मदद नहीं दे सका है। इन गांवों के लोगों का कहना है कि नदी का जलस्तर लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है। बाढ़ से घिरे होने के कारण विद्यालय भी बंद पड़े हैं। जिससे नौनिहालों के भविष्य पर बाढ़ का ताला लग चुका है। बाढ़ से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में घाघरा में आई बाढ़ कम होने की उम्मीद दिखायी पड़ रही है।