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घाघरा फिर उफान पर, 13 गांवों में घुसा पानी

Tue, 25 Jul 2017 11:16 PM IST
amar ujala
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 घाघरा का तांडव मंगलवार को भी जारी रहा। घाघरा ने 10 मीटर बांध का हिस्सा अपने में समाहित कर लिया। घाघरा की कटान इतनी तेज है कि नदी का फैलाव नकहरा गांव के नजदीक होता जा रहा है। घाघरा एल्गिन-चरसड़ी बांध के मुख्य हिस्से में करीब एक किलोमीटर तक कटान कर रही है।
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मंगलवार तक किसानों की करीब पांच सौ बीघे से अधिक खेत घाघरा की धारा में समाहित हो चुका है। घाघरा का रुख अब नकहरा गांव की ओर मुड़ गया है। तीन दिनों में करीब 11 सौ बीघे जमीन नदी में समाहित हो चुकी है।

सोमवार को घाघरा का जलस्तर 106.126 था तो मंगलवार को दो सेंटीमीटर ऊपर हो गया। घाघरा का जलस्तर देर शाम को 106.156 पर पहुंच गया। घाघरा बाढ़ क्षेत्र के लिए एक बार फिर से तबाही लेकर खड़ी हो गई। तमाम कोशिशें चल रही थीं उसी बीच कट-वन का करीब 10 मीटर से अधिक हिस्सा कटकर घाघरा में समा गया।
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अधिकारियों के कैम्प कार्यालय तक कटान करके छप्पर में चल रहे कार्यालय को घाघरा ने निशाने पर ले लिया है। यहां अस्थाई कार्यालय बनाया गया है। नदी ने अपने कटान का रुख ही बदल दिया है। कभी मशीना उठने से तो कभी बांध के नीचे-नीचे कटान करते हुए नदी बांध को अपना निशाना बना रही है।

बेहटा व पारा गांव तक करीब एक किलो मीटर से अधिक दायरे में नदी अभी भी कटान करने में तेजी से जुटी है। दूसरी ओर ग्राम काशीपुर के सामने कट-टू का भी करीब 20 मीटर हिस्सा कटान के दायरे में आ गया है। काशीपुर के पास बना  रिंग बांध का अस्तित्व भी अब खतरे में है। अब तक कुल 1100 बीघे भूमि घाघरा तीन दिनों में निगल चुकी है। किसानों की गन्ना, मक्का व धान की फसलें पूरी तरह से चौपट हो चुकी हैं। 

बाढ़ से प्रभावित गांवों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के करीब एक दर्जन से अधिक गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। जिन गांवों में पानी भरा वह और बढने लगा है। जिले की सीमा पर बसे बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायतों के 34 गांव में एक बार फिर से पानी बढने लगा है।

ग्रामीणों में रामनेवाज, शिवकुमार, पप्पू, छोटेलाल, सुन्दर आदि ने बताया कि बाराबंकी जिले के गांवों में प्रशासन कोई सुधि नहीं ले रहा है। गांव की स्थिति लगातार बद्तर होती जा रही है। गोंडा के घरकुंइया, प्रतापपुर, पूरे अंगद, पूरे अजब, अतरसुइया, रेक्सडिय़ा, बहुवन मदार मांझा की ओर पानी बढने लगा है। 

मंगलवार को मंडलायुक्त एसबीएस रंगाराव ने बांध का निरीक्षण किया। उनको बाढ़ एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने एक करोड़ रुपये की स्वीकृति व कराये गये कार्य का प्रस्ताव दिखाया। आयुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को बांध को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास तेज करने तथा धारा को मुडने से रोकने का कार्य तेजी से चलाने का निर्देश दिया। उनके साथ जिले के अधिकारी व एसडीएम करनैलगंज अर्चना वर्मा मौजूद रहीं।

एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि बांध में कटान को देखते हुए बांध को बचाने का कार्य संभव नहीं हो पा रहा है। बांध का हिस्सा तेजी से नदी में समाता जा रहा है। जिससे करनैलगंज तहसील क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की आशंका फिर बलवती हुई है।
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