मौजूदा समय हर दस किलोमीटर पर पेट्रोल पंप मिल जाएंगे। यहां तक कि अब ग्रामीण क्षेत्र मे भी सड़कों के किनारे पेट्रोल व डीजल के पंप संचालित हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इमरजेंसी सेवा की तरह पेट्रोल के फुटकर विक्रेता अभी भी अपनी दुकान सजाकर वाहन चालकों को तय कीमत से पांच रुपये अधिक लेकर प्रति लीटर की दर से खुलेआम बिक्री करते दिख रहे हैं। जिले भर में भ्रमण करने वाले जिला पूर्ति अधिकारी की नजर ऐसी दुकानों पर नहीं पड़ रही हैं।
जिले के बालपुर, बेलसर, कटराबाजार, रामापुर, कौड़िया बाजार, खरगूपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में चौक-चौराहों पर पेट्रोल की धड़ल्ले से बिक्री बिक्री होती है।
रात दस बजे जब पेट्रोल पंप बंद हो जाते हैं तो ये दुकानदार इमरजेंसी सेवा की तरह वाहन चालकों को महंगे दाम पर पेट्रोल उपलब्ध करा देते हैं।
गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बालपुर कस्बा है। यहां एक टायर रिपेरिंग की दुकान पर पेट्रोल बिकता दिखा। जो भी बाइक सवार पहुंचता है, उसे यह सुविधा तुरंत मिल जाती है।
इस बाजार से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर दो पेट्रोल पंप है। लेकिन लोग वहां तक जाने की जहमत नहीं उठाते। यदि किसी का वाहन पंक्चर हो गया तो उसे बनवाने के साथ पेट्रोल भी वहीं से खरीद लेता है।
इसी के बगल एक परचून की दुकान के सामने खुलेआम पेट्रोल की बिक्री होती पाई गई। ये पेट्रोल की बिक्री सड़क के किनारे खुलेआम की जाती है।
पेट्रोलियम प्रोडक्ट डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कृष्ण पांडेय का कहना है कि पेट्रोल की बिक्री दुकानों पर खुलेआम की जा रही है तो वह पेट्रोलियम नियमों के खिलाफ है।
पेट्रोलियम पदार्थों की ब्रिकी बिना लाइसेंस के नहीं की जा सकती है, क्योंकि वह अति ज्वलनशील होता है। इससे हादसे का खतरा है। ऐसी बिक्री के खिलाफ अधिकारियों को अभियान चलाकर उसे बंद कराकर बिक्री करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।
जिला पूर्ति अधिकारी गोंडा विमल कुमार शुक्ल का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों, भीड़भाड़ वाली बाजारों में पेट्रोल की बिक्री की जा रही है तो वह आपूर्ति नियमों के खिलाफ है।
पूर्ति निरीक्षकों को ऐसे दुकानदारों के खिलाफ पड़ताल करके एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।