गोंडा। जिले के सदर तहसील के नौबरा गांव की पट्टा पत्रावली में हेराफेरी का मामला सामने आया है। दो लोगों ने तहसील के कुछ कर्मियों से मिलीभगत कर पट्टा पत्रावली में हेराफेरी कर पट्टा की भूमि पर कब्जा मांगने लगे। इसकी जांच होने पर हेराफेरी का मामला सामने आया है। एसडीएम ने जांच कराने के बाद मुख्य राजस्व अधिकारी को रिपोर्ट भेजी है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति भी की गई है।
तहसील सदर के नौबरा गांव के सूर्यलाल व बृजलाल ने जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री को प्रार्थना पत्र दिया और पट्टे के कागजात लगाए। उन्होंने बताया कि 1983 में भूमि पट्टे पर मिली थी, पट्टे की भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग किया। मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) जयनाथ यादव ने इसकी जांच कराने के लिए एसडीएम सदर को रिपोर्ट भेजी। जहां नायब तहसीलदार ने मामले की जांच किया। जिसमें यह तथ्य सामने आया कि जिस भूमि के पट्टे होने का दावा दोनो कर रहे हैं उसका पट्टा ही नहीं हुआ।
पट्टा पत्रावली की जांच हुई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिसमें पहले पन्ने पर तीन प्रकार की स्याही और कलम से तीन बार स्वीकृति दर्ज मिली। एसडीएम की लिखावट व हस्ताक्षर फर्जी होने की आशंका हुई। यही नहीं पत्रावली का तीसरा पन्ना भी पहले और दूसरे से भिन्न मिला। इसी तरह कई तरह की और हेराफेरी मिली। पट्टेदारों के नाम बढ़ाए जाने की आशंका होने पर एजेंडा व कार्यवाही के पन्नों की जांच हुई। जिससे पुष्टि हुई कि इन दोनों के नाम बाद में बढ़ाए गए हैं। पूरे मामले में तहसील के कार्मिकों की भूमिका भी सवालों से घिरी है। जानकारी पट्टे का दावा करने वालों से ही संभव है।
एसडीएम विनोद कुमार सिंह ने पूरे मामले में दोनों के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति की है। जिससे तहसील के उन कर्मियों की पहचान भी हो सके, जो इस मामले में शामिल हैं। फिलहाल एसडीएम की कार्रवाई से फर्जीवाड़ा करके भूमि को हथियाने का खेल नहीं हो सका है।
फर्जी अभिलेख के आधार पर पट्टे की भूमि साबित करने का मामला पकड़ में आया है। इसकी रिपोर्ट मुख्य राजस्व अधिकारी को भेजी गई है। दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई होगी। विनोद कुमार सिंह, एसडीएम सदर