गोंडा। शहर के सिविल लाइन में तीन एकड़ भूमि पर कब्जे का खेल सामने आने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। शहर के आसपास के करीब 33 गांवों की सरकारी जमीनों की पड़ताल हो रही है। इसकी रिपोर्ट में अवैध कब्जे या फिर किसी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आने पर प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
शहरी क्षेत्र से सटे गांवों की जमीन पर भी धंधेबाजों की नजर है। विनियमित क्षेत्र में शामिल गांवों के साथ ही मेडिकल कॉलेज निर्माण होने से उसके आसपास के गांवों की जमीनों का भाव बढ़ गया है। इसलिए लग्जरी वाहनों से धंधेबाज सरकारी जमीनों की तलाश में रहतेे हैं, इसकी भनक प्रशासन को भी लग गई है।
सदर तहसील के राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों को गांवों में निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे सरकारी जमीन पर किसी तरह का कब्जा हो रहा हो या फिर कोई प्रयास में हो तो पहले ही जानकारी मिल जाए। जिससे कार्रवाई की जा सके। इसमें लापरवाही मिलने पर राजस्व निरीक्षकों के साथ ही लेखपालों की जिम्मेदारी भी तय होगी।
इन गांवों में जमीनों की बढ़ाई गई निगरानी
शहर के आसपास के ग्राम पंचायत गिर्द गोंडा, जानकीनगर, बड़गांव, इमिलिया गुरदयाल, छावनी सरकार, परेड सरकार, पथवलिया, बभनी कानूनगो, कटहामाफी, केशवपुर पहड़वा, रुद्रपुर विसेन, बूढ़ादेवर, पूरे शिवाबख्तावर, इमरतीविसेन, विमौर, झंझरी, देवरियाचूड़ामणि, लक्ष्मनपुर, सोनीहरलाल, उम्मेदजोत, हारीपुर, राजापुर, खैरा, दत्तनगरविसेन, शेखापुर, सेमरादम्मन, रानीजोत, इंद्रापुर, धनौली, मोकलपुर, कपूरपूर, भदुवा तहरहर, माधवपुर चकत्ता गावों में निगरानी बढ़ाई गई है।
फर्जी वसीयत से जमीन हड़पने के एक दर्जन केस
जिले में भूमि हड़पने के अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं। फर्जी बैनामे से ही दूसरे की जमीन हड़पने के 47 मामले सामने आए हैं। इसकी जांच एसआईटी और क्राइम ब्रांच कर रही है। वहीं पाकिस्तान गए व्यक्ति की 16 बीघे जमीन माधवपुर चकत्ता में हड़पने के प्रयास का खुलासा हो चुका है। इसके साथ ही शहर में ही आधा दर्जन मामलों में कार्रवाई की गई है। फर्जी वसीयत के सहारे भी जमीन हड़पने के एक दर्जन केस सामने आ चुके हैं। इन मामलों की जांच हो रही है।
शहर हो या पंचायतें सभी जगह की सरकारी जमीनों की निगरानी की जा रही है। रिपोर्ट भी ली जा रही है, जहां के मामले सामने आएंगे कार्रवाई होगी। जल्द ही तहसीलदार, नायब तहसीलदारों की बैठक करके नई रणनीति भी तैयार की जाएगी।
जयनाथ यादव, मुख्य राजस्व अधिकारी