गोंडा। मनकापुर कोतवाली क्षेत्र में 24 साल पूर्व दलित उत्पीड़न, बलवा, मारपीट व जान से मारने की धमकी के मामले में दोषी ठहराए गए चार आरोपियों को विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) ने दो साल कारावास और 4500-4500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विशेष लोक अभियोजक (एससी-एसटी एक्ट) कृष्ण प्रताप सिंह ने बताया कि मनकापुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कंगलापुर हरनाटायर निवासी राजेश कुमार ने कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसके दरवाजे के सामने आबादी की भूमि में उसका निकास है। इसी जमीन में उसका घूर गड्ढा व गन्ने की पत्ती रखी है। 30 अप्रैल 1999 को सुबह आठ बजे गांव के ही तिरमोहन सिंह अपशब्द कहते हुए गन्ने की पत्ती को फेंक रहे थे।
विरोध करने पर तिरमोहन सिंह, सत्येंद्र सिंह व उनके भाई संजय सिंह, शारदा सिंह व लल्लन सिंह लाठी, फरसा व कुदाल लेकर आए और जान से मारने की धमकी देते हुए उसके भाई विजय प्रताप को मारापीटा। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना की और पुख्ता साक्ष्य के आधार पर पांचों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान आरोपी अभियुक्त शारदा सिंह की मृत्यु हो गई। ट्रायल के दौरान साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने आरोपी तिरमोहन सिंह, सत्येंद्र सिंह, संजय सिंह व लल्लन सिंह को दोष सिद्ध किया। विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) नासिर अहमद ने चारों अभियुक्तों दो-दो साल की सजा सुनाई।