डाक घर में बीमा पालिसी पर लिए गए कर्ज को लौटाने के बाद पालिसी बांड की मांग करने पर डाक अधीक्षक ने अपने सहयोगी बाबू के साथ मिलकर पालिसी धारक को जमकर पीटा। आरोप है कि पिटाई के बाद उसे नशीली दवा खिलाकर करीब 8 घंटे तक कमरे में बंद रखा। पालिसी धारक ने सीजेएम की अदालत में प्रार्थना दिया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने डाक अधीक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
कटराबाजार थाना क्षेत्र के धोबहाराय गांव के रहने वाले रामचंद्र शुक्ल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसने डाक विभाग की ओर से संचालित ग्रामीण डाक बीमा योजना के तहत अपना बीमा कराया था।
जरूरत पड़ने पर इस बीमा पालिसी से रामचंद्र ने 12 हजार रुपये का कर्ज ले लिया था। रामचंद्र ने बताया कि अगस्त 2015 में उसने करीब 23 हजार रुपये कर्जे की रकम को ब्याज सहित डाक विभाग के संदीप के पास जमा कर दिया। लेकिन संदीप ने उसे इसकी रसीद बाद में लेने के लिए कहा।
रामचंद्र का आरोप है कि संदीप उसे करीब दो माह तक दौड़ाता रहा, लेकिन उसे रसीद नहीं दी। दो माह बाद संदीप ने रामचंद्र से और 268 रुपये मांगे और जुगाड़ से रसीद देने की बात कही। बाबू की बात समझ में न आने पर पांच नवंबर 2015 को इस मामले की शिकायत लेकर जब वह डाक अधीक्षक पवन कुमार श्रीवास्तव के पास गया तो उन्हाेंने उसकी शिकायत सुनने के बजाय उसे थप्पड़ मार दिया।
रामचंद्र का कहना है कि जब उसने विरोध किया तो डाक अधीक्षक ने सहयोगियों के साथ उसे जमकर पीटा और नशीली दवा खिला दी, जिससे वह बेहोश हो गया। उसे आठ घंटे तक कमरे में बंद रखा गया। इसके बाद रात में उसे एक वाहन में बैठाकर उसके घर के सामने छोड़ दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डाक अधीक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए हैं।