गोंडा। दहेज उत्पीड़न, हत्या के प्रयास और मारपीट के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय) संदीप तिवारी की अदालत ने पति समेत चार आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने वादी मुकदमा के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता दीपशिखा के पिता तिलकराम ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद मोटरसाइकिल की मांग को लेकर उसकी बेटी को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। 11 अगस्त 2019 को आरोप लगाया गया कि ससुराल पक्ष ने दीपशिखा को जान से मारने की नियत से उसे गंभीर रूप से घायल कर शिव मंदिर के पास फेंक दिया। इस मामले में पति राकेश तिवारी, जेठ राजेश तिवारी, ननद पूनम शुक्ला तथा ननदोई निबरे उर्फ रामलोचन शुक्ला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। उसने अपने बयान में कहा कि घटना के समय उसका पति अहमदाबाद में था। जेठ, ननद व ननदोई ने उसके साथ कोई मारपीट नहीं की। उसने बताया कि शौच से लौटते समय कुछ अज्ञात लोगों ने उसके जेवर लूटने का प्रयास किया और विरोध करने पर सिर पर वार कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गई थी। उसने यह भी कहा कि विवाह के बाद ससुराल में कभी कोई विवाद या मारपीट नहीं हुई।
इन परिस्थितियों में अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय) ने फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों राकेश तिवारी, राजेश तिवारी, पूनम शुक्ला और निबरे उर्फ रामलोचन शुक्ला को बरी कर दिया। साथ ही न्यायालय ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वादी के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का भी आदेश दिया।