शिक्षा के क्षेत्र में नकल को लेकर यूपी बहुत बदनाम है। यहां शिक्षा एक व्यापार बन गई है, जिसे बढ़ाने में नकल माफिया का विशेष योगदान है। शिक्षा का बाजारीकरण बंद कर नकल के समूल नाश का संकल्प लेना होगा ताकि शिक्षा के माहौल का भविष्य उज्ज्वल कर यूपी को एक उत्तम प्रदेश बनाया जा सके। यह बात राज्यपाल राम नाईक ने गुरुवार को नंदिनीनगर महाविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कही।
नंदिनीनगर महाविद्यालय में 35वीं बालक व 19वीं महिला जूनियर कुश्ती चैंपियनशिप के उद्घाटन मौके पर राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि शिक्षा के लिए नकल एक कैंसर की तरह है, जिसे हमें जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। इसे आज खत्म नहीं करेंगे तो कल यही बीमारी महामारी बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के 22 विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह की जो परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही थी, उसे उन्होंने फिर से शुरू करने की ठानी है। 22 में से 18 विश्वविद्यालयों का दीक्षांत समारोह वह कर चुके हैं, जबकि जो चार विश्वविद्यालय में जल्द ही समारोह होगा।
इस मौके पर उन्होंने देश के 25 प्रदेशों से कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेने आए पहलवानों की हौसला आफजाई करते हुए आदिकाल से चले आ रहे कुश्ती के इतिहास पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि खेल में हार-जीत तो लगी ही रहती है। लेकिन इस हार-जीत से ऊपर है खेल को खेल की भावना से खेलना। क्योंकि जो हारता है वह कभी जीतता भी है। इसलिए हर किसी को, वह जिस भी क्षेत्र में आगे है, उस क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करते रहना चाहिए।
इससे पहले राज्यपाल ने इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल का उद्घाटन करते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब किसानों के लिए चल रही भैंस वितरण योजना में 40 किसानों को भैंसें दीं।
इस मौके पर भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष व कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राज्यपाल रामनाईक को विश्वास दिलाया कि अगले ओलंपिक में भारत अपने साथ छह पदक लेकर आएगा। इस मौके पर पूर्व सांसद सत्यदेव सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष पीयूष मिश्र, पूर्व विधायक तुलसीदास राय चंदानी, आरएसएस के विभाग प्रचार दीपक आदि मौजूद रहे।
आजम के सवालों के जवाब से पलटे राज्यपाल
पत्रकारों से मुखातिब राज्यपाल राम नाईक से जब आजम खां को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि राज्यपाल पद की एक गरिमा होती है, जिस पर रहते हुए वह उनके किसी भी सवाल का जवाब देना उचित नहीं समझते।
वहीं सपा मुखिया के कहे गए वक्तव्य ‘आरएसएस के विद्यालयों में पनप रहा आतंकवाद’ को सपा मुखिया की निजी सोच बताया। उन्होंने कहा कि वह खुद भी एक स्वयंसेवक हैं और वह जानते हैं कि आरएसएस क्या है, इसलिए जिस व्यक्ति को ऐसा लगता है, उसे बोलने की पूरी आजादी है, लेकिन वह जानते हैं कि जो भी ऐसा बोल रहा है, वह सच नहीं है।