गोंडा। पचरन लोहारन पुरवा गांव में अग्नि पीड़ित दस परिवार के लोगों के सिर से छांव छिन गई है। अग्निकांड में मासूम बेटी को गंवा चुके माता-पिता समेत दस परिवार के लोगों ने पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजारी। गांव के लोगों ने उनके भोजन का इंतजाम तो कर दिया। मगर बसेरा न होने से सभी परेशान है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को आपदा राहत कोष से मदद पहुंचाने के निर्देश दिए थे। इस पर जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर खरगूपुर के नायब तहसीलदार अनुराग पांडेय ने गांव पहुंचकर पीड़ितों को दिलासा तो दी मगर कोई मदद नहीं की। सरकारी इमदाद न मिलने से पीड़ितों में प्रशासन के प्रति आक्रोश है।
थाना क्षेत्र के पचरन लोहारन पुरवा गांव निवासी पिंटू सोनकर के घर में गुरुवार को चूल्हे की चिंगारी से आग लग गई थी। अग्निकांड में रूबी (3) की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। आग की चपेट में आने से नौ अन्य लोगों के छप्पर के घर जलकर राख हो गए थे। आग से बेघर हुए दस परिवारों के 43 लोगों ने बृहस्पतिवार की रात खुले आसमान के नीचे गुजारी।
अग्निपीड़ितों ने बताया कि गांव वालों ने उनके भोजन का इंतजाम किया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अफसर आए थे और मदद का आश्वासन भी दिया। मगर उन्हें कोई भी सरकारी इमदाद नहीं मिली। लेखपाल बाबूराम ने बताया कि आग से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। तहसील को भेज दी जाएगी।
पचरन लोहारन पुरवा में बृहस्पतिवार को हुए अग्निकांड के बाद से विद्युत आपूर्ति ठप है। ग्रामीणों ने बताया कि आग की तेज लपटों से सभी केबल जल गए। आग लगने पर विद्युत उपकेंद्र खरगूपुर के अवर अभियंता अमोद कुमार को फोन पर सूचना दी गई थी। उन्होंने लाइन कटवा दी थी। उन्होंने बताया कि अभी केबल उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध होने पर विद्युत आपूर्ति बहाल करा दी जाएगी।