गोंडा। फर्जी दस्तावेजों के जरिये फर्म का जीएसटी पंजीकरण कराने और करीब 2.22 करोड़ रुपये के आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का अनुचित दावा करने का मामला आया है। नगर कोतवाली पुलिस ने कोलकाता निवासी महिला के खिलाफ राज्य कर विभाग खंड-4 के राज्य कर अधिकारी मूलचंद्र शर्मा की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
राज्य कर अधिकारी ने बताया कि सर्वश्री भगवंत इंटरप्राइजेज नाम से जीएसटी में पंजीकृत फर्म की ऑनलाइन जानकारी की जांच में अनियमितताएं मिलीं। फर्म की स्वामिनी कोलकाता निवासी जराना खातून बताई गई हैं। आरोप है कि जीएसटी पंजीकरण के लिए बिजली बिल और किरायानामा समेत कूटरचित दस्तावेज लगाए गए। 26 अगस्त को विभागीय टीम ने घोषित कारोबारी स्थल का सत्यापन किया तो वहां फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला।
विभाग के अनुसार, फर्म ने अक्टूबर 2025 में करीब 45.55 लाख रुपये और जुलाई 2026 में करीब 11.94 करोड़ रुपये का आउटवर्ड सप्लाई कारोबार दर्शाया। जांच में बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के आईटीसी का दावा किए जाने की बात सामने आई। विभाग ने करीब 2.22 करोड़ रुपये के आईटीसी के अनुचित दावे का उल्लेख किया है। तहरीर में आरोप है कि फर्म के जरिये कागजी लेनदेन कर आईटीसी का लाभ लेने का प्रयास किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है। विभाग के अनुसार फर्म का जीएसटी पंजीकरण 27 अगस्त 2026 को निलंबित कर दिया गया था। सीओ सिटी योगेंद्र सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। कोतवाली नगर पुलिस मामले की जांच कर रही है।