गोंडा। धान खरीद में अधिकारियों की मनमानी व जटिल प्रक्रिया किसानों के धान की बिक्री पर भारी पड़ रही है। धान बेचने के लिए आन लाइन आवेदन करने वाले 854 किसानों का तहसीलों में सत्यापन न होने से उनका धान नही बिक पा रहा है। यह किसान अपने धान बेचने के लिए अपना व अपने खतौनी का सत्यापन कराने के लिए तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं।
मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों से सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू कर दी गई है। लेकिन इसके लिए शासन ने किसानों को अपना ब्योरा शासन की निर्धारित पोर्टल पर आनलाइन करने को अनिवार्यता कर दी है। बिचौलियों की धान खरीद पर लगाम लगाने के लिए शासन ने असली किसानों को चिन्ह्ति करने के लिए संबंधित जिला प्रशासन को अधिकृत किया है। जिस किसान ने ऑनलाइन आवेदन किया है वह वास्तविक किसान है और वह अपना ही उपज बेच रहा है इसके सत्यापन के लिए संबंधित तहसीलों के एसडीएम को जिम्मेदारी दी गई है। जिले में कुल 4.88 लाख किसान हैं, जिसमें से धान बेचने के लिए शासन के निर्धारित पोर्टल पर अब तक कुल 2250 किसानों ने ही ऑनलाइन आवेदन किया है। इसमें से तहसील स्तर अभी तक 854 किसानों की आवेदन पत्रावली सत्यापन के लिए लंबित है।
जिले के 854 किसानों का धान समय से नही बिक पा रहा है। किसान परेशान है। अपनी उपज को बेचने के लिए वह रोज तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय उनका वक्त बहुत कीमती है। इस समय रबी सीजन के फसलों की बोवाई व खेत तैयार करने का काम जोर पकड़े है। धान की बिक्री हो जाती तो उस पूंजी को किसान दूसरी फसलों में लगाकर बेहतर काम करते। इस बात से किसान हलकान हैं। तहसील के अधिकारी सत्यापन पत्रावली दबाए बैठे हैं।
जिले में धान खरीद की स्थिति इस बार पिछले साल से अधिक हो रही है। पंजीयन के सत्यापन में देरी होने से किसानों को क्रय केंद्र पहुंचने में दिक्कत हो रही है। शासन की ओर से यह व्यवस्था की गई है कि जिन किसानों की ओर से धान बेचने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा रहा है उसके बारे में एसडीएम सत्यापन रिपोर्ट देंगे तब उसका धान क्रय किया जाएगा। जितने लोगों का आवेदन हुआ है इसके सापेक्ष काफी कम किसानों ने धान बेचा है इसकी वजह तहसील स्तर पर आवेदन का सत्यापन न होना बताया जा रहा है। समय से सत्यापन के आदेश दिये जा चुके हैं। -लाल बहादुर गुप्ता,जिला विपणन अधिकारी गोंडा।