करनैलगंज (गोंडा)। मार्च के महीने में ओलावृष्टि एवं अतिवृष्टि से प्रभावित हुए किसानों की चिह्नित की गई संख्या के सापेक्ष मात्र एक प्रतिशत किसानों को ही उनके फसल के नुकसान की भरपाई दी गई है। बाकी 99 प्रतिशत किसान सरकारी सहायता मिलने की आस में चक्कर काट रहे हैं। कोरोना महामारी से बचाव के लिए लगाये गये लॉकडाउन के बाद ओलावृष्टि व अतिवृष्टि से प्रभावित हुए किसानों को मिलने वाली सहायता भी लॉकडाउन का शिकार हो गई। साढे़ 11 हजार प्रभावित किसानों में मात्र 175 किसानों को ही सरकारी इमदाद का लाभ मिल सका है। बाकी किसान अपने नुकसान का लाभ पाने के लिए अपने खातों को चेक कराते घूम रहे हैं। मगर उनके खातों में कोई भी भुगतान नहीं हुआ है।
बीते 13 मार्च को करनैलगंज तहसील क्षेत्र में ओलावृष्टि एवं अतिवृष्टि के कारण किसानों की गेहूं, सरसों, अरहर, गन्ना की फसल तबाह हो गई थी। जिसमें प्रशासन द्वारा 34 गांवों को ओलावृष्टि, अतिवृष्टि से प्रभावित घोषित किया गया था। इन 34 गांव में 11 हजार 460 किसानों को चिन्हित किया गया था। जिनके फसल का नुकसान हुआ था और किसानों को 13 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सरकार द्वारा क्षतिपूर्ति मिलना था। इस सिलसिले में ओलावृष्टि के एक सप्ताह के बाद जिले के प्रभारी मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने करनैलगंज की ग्राम मसौलिया में एक समारोह आयोजित कर 130 लोगों को उन्होंने सहायता का चेक वितरित किया था और कुछ किसानों को सीधे उनके खाते में नुकसान का लाभ भेज दिया गया था।
कुल मिलाकर 175 लोगों को 12 लाख रुपये की सहायता राशि केवल दी गई है। जबकि सभी लाभार्थियों को मिलाकर 2 करोड़ 51 लाख की सहायता का वितरण होना था। इसी बीच मार्च में ही कोरोना के चलते लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। लॉकडाउन लगने के बाद किसानों को मिलने वाले इस लाभ को भी लॉक कर दिया गया। अब तक किसानों को उनके नुकसान का लाभ नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि मार्च महीने के बाद वित्तीय सत्र बदल जाने के कारण जब तक प्रदेश या जिले के अधिकारियों द्वारा संस्तुति नहीं की जाती है तब तक नए सिरे से आपदा कोष का धन नहीं हस्तांतरित किया जा सकता है। ऐसे में अब किसानों के नुकसान पर मिलने वाली सरकारी इमदाद मझधार में फंसी हुई है।
वित्तीय सत्र का बदलाव होने के बाद नए सिरे से दैवीय आपदा का धन तहसील के खाते में आने के बाद में ही इसका भुगतान किया जा सकता है। हालांकि सभी किसानों के नुकसान का आकलन करके उन्हें सूचीबद्ध किया जा चुका है। दैवीय आपदा का धन प्राप्त होते ही सभी किसानों को सीधे खाते में भुगतान भेज दिया जाएगा।
-बृजमोहन, तहसीलदार करनैलगंज