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आई फ्लू : जुलाई में बिका 9.36 करोड़ का आई ड्राॅप

Tue, 01 Aug 2023 11:22 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। जिले में आई फ्लू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। हर घर में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक चपेट में आ रहे हैं। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में ही 310 मरीजों की ओपीडी नेत्र परीक्षण अधिकारी ने की। बीमारी बढ़ने से आई ड्राॅप के कारोबार में तेजी से उछाल आ गया। जुलाई में ही करीब 11 लाख 70 हजार आई ड्राॅप बिके हैं। इसकी कीमत 9.36 करोड़ रुपये बताई जा रही है। अब आई ड्राॅप की किल्लत शुरू हो गई है। जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
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जिले में जुलाई के पहले सप्ताह से आंखों की बीमारी पांव पसारने लगी। देखते ही देखते आई फ्लू का प्रकोप तेजी से बढ़ गया। बाबू ईश्वर शरण अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में पिछले डेढ़ साल से कोई चिकित्सक तैनात नहीं है। नेत्र परीक्षण अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। सोमवार को 310 मरीजों का उपचार हुआ। वहीं बीमारी बढ़ने से आई ड्रॉप की बिक्री भी बढ़ी है।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राकेश सिंह के अनुसार जिले में 3,900 मेडिकल स्टोर हैं। प्रत्येक स्टोर से हर रोज औसतन 10 आई ड्रॉप बिके हैं। इस हिसाब से महीने भर में 11 लाख 70 हजार आई ड्रॉप की बिक्री हुई। जिसकी कीमत 9.36 करोड़ रुपये है। ड्राॅप की बिक्री में तेजी आने से अधिकांश मेडिकल स्टोरों पर स्टॉक खत्म हो गया है। ऑर्डर करने पर भी आंख के दवाओं की उपलब्धता नहीं हो रही है।
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मेडिकल कॉलेज के बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय में डेढ़ साल से आई सर्जन की कुर्सी खाली है। आंख के निजी अस्पताल भी काफी कम हैं। ऐसे में बीमारी बढ़ने से डॉक्टरों की कमी खल रही है। मेडिकल कॉलेज में तैनात नेत्र परीक्षण अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि डॉक्टर न होने के कारण वह खुद मरीजों की जांच कर दवाएं देते हैं। हर रोज 300 से अधिक मरीज आ रहे हैं। एसी खराब होने के कारण ओपीडी छह के बाहर कुर्सी लगाकर उपचार करना पड़ रहा है।
एसीएमओ व नेत्र सर्जन डॉ. जयगोविंद ने बताया कि आई फ्लू के मरीजों के आंखों में लालिमा, पलकों में सूजन और खुजली हो सकती है। पीला या पानी जैसा स्राव हो सकता है। पलकें चिपचिपी हो सकती हैं। बच्चों को बुखार हो सकता है। बचाव के लिए आंखों को साफ करने के लिए आई वाइप्स का इस्तेमाल करें। अपनी आंखें न मलें, सुरक्षात्मक व गहरे चश्मे का प्रयोग करें। कॉन्टैक्ट लेंस के उपयोग से बचें। घरेलू उपचार या स्व-नुस्खे का उपयोग करने से बचें। अपनी आंखों में किसी भी ड्रॉप का उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लें।
औषधि निरीक्षक रजिया बानो का कहना है कि मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण कर जानकारी जुटाई जा रही है कि कहीं महंगे दाम में आई ड्राॅप तो नहीं बिक रहा है। आंख के दवाओं की गुणवत्ता परखी जाएगी। ओवररेट दवाएं बेचने पर कार्रवाई की जाएगी।
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