पसका (गोंडा)। व्यक्ति को परिश्रम करने के साथ धैर्य भी रखना चाहिए। क्रोध के क्षण में भी धैर्य का एक पल दुख के हजार पलों से बचे रहने में हमारी सहायता करता है। ये बातें परसपुर के ग्राम मधईपुर खांडेराय के श्री बैरिहा ब्रह्मचारी बाबा के स्थान पर आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा में प्रवाचक ललित कृष्ण शास्त्री ने कहीं। प्रवाचक ने महाराज परीक्षित के जन्म, राजा परीक्षित को श्राप और शिव विवाह तथा सुखदेव जी के जन्म की कथा सुनाई। प्रवाचक ने कहा, आज मानव मूल्यों का नैतिक पतन तेजी से हो रहा है। लोग पाश्चात्य सभ्यता को अपनाकर अपनी आध्यात्मिक विरासत से विमुख हो रहे हैं। इससे समाज में नाना प्रकार के असंतोष, अशांति, क्लेश, दुख और भय व्याप्त हो रहा है। परिवारों में शांति का अभाव हो गया है। लोग एक-दूसरे से शत्रुता का भाव रख रहे हैं। अगर इन बुराइयों से बचना है तो हमें अपने नैतिक मूल्य भारतीय संस्कृति और सनातन साहित्य की ओर लौटना होगा। (संवाद)