करनैलगंज के माझा रायपुर गांव में बाढ़ के पानी से घिरा मजरा। -फाइल फोटो
गोंडा। माझा क्षेत्र में प्रतिवर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलने वाले ग्रामीणों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। बाढ़ से बचाव की तैयारियांं अभी प्रक्रिया के जाल में फंसी हुई हैं। बाढ़ के समय 10-20 दिन अधिकारी क्षेत्रों में जाते हैं, लेकिन उसके बाद कोई उनकी तरफ झांकने तक नहीं जाता। इससे उनकी पीड़ा और भी बढ़ जाती है।
खेतों में पानी भरने से जहां फसल चौपट हो जाती है, वहीं पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो जाता है। शुद्ध पानी के लिए भी उन्हें तरसना पड़ता है। बाढ़ के चलते जिले के करनैलगंज व तरबगंज की हजारों की आबादी प्रभावित होती है। लोगों को बाढ़ जैसी आपदा से बचाने के लिए योजनाएं तो बनती हैं लेकिन, समय पर क्रियान्वयन न होने से मुश्किलें बढ़ाती हैं।
रायपुर माझा निवासी तीरथ यादव, मंंशाराम, सुरेश यादव, सुखलाल गौतम, रामनरेश, बच्चाराम, मोलहू कश्यप, रंगनाथ ने बताया कि बाढ़ उनका सब-कुछ छीन लेती है। खेती चौपट होने से खाने के लाले पड़ जाते हैं। बाढ़ के दौरान सरकारी तंत्र से बंटने वाला लंच पैकेट ऊंट के मुंह में जीरा साबित हाेता है। बाढ़ के बाद की स्थिति क्या होती है, यह वही लोग जानते हैं। किस तरह से परिवार का पेट भरते हैं।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता जय सिंह का कहना है कि जल्द ही बांध को दुरुस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।