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दर्द भी बेटी का नही डिगा सका हौसला

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गोंडा। परसपुर के पसका गांव की एसिड अटैक पीड़िता खुशबू को भले ही जिंदगी भर का दर्द मिला हो लेकिन हौसला कम नहीं हुआ है। छांव संस्था के सहयोग से लखनऊ केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में बेटी का अभी इलाज हो रहा है। संस्था के दुर्गा प्रसाद शुक्ल ने कहा कि बेटी बहुत हिम्मती हैं और गुरुवार को उसे परिवार के लोगों ने खाना खिलाया। अब वह खाना भी खा रही है और परिवार से बात भी की।
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केजीएमयू में कुछ इलाज और जांच होने के बाद उसके प्लास्टिक सर्जरी का प्लान तैयार किया गया है। इसके प्लास्टिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों से बेटी के स्वास्थ्य की जानकारी देकर चर्चा की जा रही है।
मंगलवार की रात में छत पर बने कमरे में तीन बहनों के साथ सोई खुशबू पर एसिड फेंका गया था। जिसमें उसका चेहरा झुलस गया था लेकिन शुक्र रहा कि आंखें बच गईं। उसकी दो बहनें हल्की झुलसी हैं जिनका इलाज जिला अस्पताल में ही हो रहा है। खुशबू को छांव संस्था की ओर से गोद लेकर फिर से पुराने स्वरूप में लाने का प्रयास कर रही है। जिससे उसे लखनऊ में भर्ती कराया गया है। गुरुवार को बेटी के स्वास्थ्य की जानकारी अमर उजाला को संस्था के दुर्गा प्रसाद शुक्ल ने दी। उन्होंने कहा कि बेटी स्वस्थ हो रही है और काफी सुधार है। उसे उचित इलाज की सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है। प्लास्टिक सर्जरी के लिए कुछ जांच होनी है। जल्द ही खुशबू के आगे के इलाज की प्रक्रिया शुरू होगी।
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महिला कल्याण विभाग ने बेटी के खाते में भेजे पांच लाख
लखनऊ में इलाज करा रही एसिड अटैक पीड़िता खुशबू के खाते में आर्थिक मदद की राशि भेज दी गई है। पसका के प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक में बेटी का बैंक खाता था, महिला कल्याण विभाग ने रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष के बजट से पांच लाख की राहत सहायता भेजा है। जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी की संस्तुति पर शासन के आदेश पर पांच लाख की राहत राशि भेज दी गई है। इसकी जानकारी भी बेटी के परिजनों को दे दी गई है।
पसका की गतिविधियों पर अभी भी टिकी है पुलिस की नजर
एसिड अटैक मामले में आरोपित आशीष को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। इसके बाद बाजार बंद करके कुछ लोग विरोध कर रहे थे। बताया जा रहा है कि इससे पुलिस सतर्क हो गई है। पुलिस ने आशीष के मुठभेड़ को सही करार दिया और स्पष्ट किया कि बेटी से यह बात करता था और इसी ने घटना को अंजाम दिया। इसलिए ही यह घर छोड़कर चला गया था। बताया जा रहा है कि सर्विलांस ट्रैकिंग से आशीष का नाम उजागर हुआ था जिसे पुलिस गोपनीय रखकर जांच कर रही थी। आशीष की लोकेशन ट्रैक होने पर मुठभेड़ हुई।
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