साकीपुर में कटान के चलते नदी की धारा में समा रहे खेत। - संवाद
करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी एक बार फिर खतरे के निशान की तरफ तेजी से बढ़ रही है। दो दिन से हो रही बारिश से नदी के जलस्तर में इजाफा हो रहा है। साकीपुर में कटान तेज होने से ग्रामीण परेशान हैं। सोमवार को नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा था, लेकिन मंगलवार को पानी तेजी से बढ़ने लगा। पानी का डिस्चार्ज भी 2.72 लाख क्यूसेक पहुंच गया है। इससे नदी का जलस्तर और बढ़ेगा।
नवाबगंज के साकीपुर में नदी की जद में खेत आने लगे हैं। धान व गन्ने के कट रहे खेतों को किसान परेशान हैं। चहलावा में तो कटान अब शांत है, लेकिन बाड़ी में कटान ने तेजी पकड़ ली है। मंगलवार को भी तेज लहरें टकराने से लगभग एक बीघा खेत पानी में समा गया। गांव के ही अंबर यादव, गम्मा यादव व नंदलाल का धान और गन्ने तथा राम सुफल व पुल्लन यादव का धान का खेत कट रहा है। अंबर यादव के तीन छप्पर भी कटान में बह गए। अब तक 10 बीघा खेत कट चुके हैं। गांव के रास्ते भी जलमग्न हैं, लेकिन सरकारी नाव नहीं मिली है। नंदलाल यादव ने बताया कि पिछले साल भी कटान से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है।
करनैलगंज के नकहरा, चंदापुर किटौली, पसका से बाढ़ का पानी निकल गया था। मगर दो दिन से हो रही बरसात से बाढ़ से प्रभावित रहे गांवों पर फिर खतरा मंडराने लगा है।
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि नदी में उतार-चढ़ाव चल रहा है। इससे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
जितने की राहत किट मिली, उससे आधा तो भाड़े पर खर्च हो गया
मंगलवार को भी तरबगंज क्षेत्र के बरियाडीहा में राहत किट का वितरण किया गया। पलिया चरौठा के सैकड़ों बाढ़ पीड़ित 10 किमी चलकर वहां पहुंचे। गांव के सूबेदार, उदयभान, हरेंद्र, अवधेश, अखलेश ने बताया कि सोमवार को भी वह किराया देकर ई रिक्शा से आए, लेकिन राहत किट नहीं मिली। दूसरे दिन मंगलवार को भी भाड़ा देकर गए तब मिली। पिछले साल गांव के स्कूल में वितरण होने से ये कष्ट नहीं झेलना पड़ा था। इस बार इतनी दूर बुलाया गया। जितने की राहत किट मिली उसका आधा तो दो दिन का भाड़ा लगा दिया। लेकिन किससे कहें कोई सुनने वाला नहीं है। रामकिशोर पांडेय ने बताया कि इतनी दूर राहत किट बंटने के कारण कुछ लोग लेने भी नहीं जा सके।