घाघरा की तेज धार से गुरुवार को एल्गिन-चरसड़ी बांध का आधा हिस्सा लोगों के देखते ही देखते कटकर नदी में समा गया। जबकि बांध के आधे बचे हुए हिस्से को जिला प्रशासन बल्लियों के सहारे नदी के पानी का रुख दूसरी ओर मोड़कर बचाने के प्रयास में लगा है। लेकिन नदी की तेज धार के आगे उनकी एक नहीं चल रही है।
इससे रात में किसी भी समय बांध के कटने की आशंका है। कहने को तो बांध को बचाने का कार्य रात-दिन बराबर चल रहा है, लेकिन इसके बाद भी गुरुवार सुबह एल्गिन चरसड़ी बंाध का आधा हिस्सा नदी में समा गया। यह मंजर देख कर बाढ़ खंड व सिंचाई विभाग के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए और वे वहां से भाग निकले।
इसकी सूचना मिलते ही सूबे के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह जब मौके पर पहुंचे तो उन्हें वहां कोई अधिकारी नहीं मिला। इस पर उन्होंने फोन पर अधिकारियों को फटकार लगाने के बाद बचाव कार्य फिर से शुरू कराया। साथ ही बचे बांध को बचाने के लिए लखीमपुर से विशेषज्ञों को बुलाने की बात कही।
उन्होंने स्वीकार किया कि अगर समय रहते बांध का काम पूरा हो जाता तो यह दिक्कत न होती। फिलहाल बांध को बचाने के लिए नदी के किनारे बल्लियां गाड़कर नदी की धारा को मोड़ने का भी प्रयास हो रहा है, लेकिन तेज धार के आगे प्रशासन की यह पहल कितना सार्थक होती है, यह तो वक्त ही बताएगा।
अगर बांध कटा तो इससे तहसील क्षेत्र के काशीपुर, नकहरा, प्रतापपुर, वैद्यपुर, भटपुरवा, रेक्सडिय़ा, पूरेअंगद, पूरेअजब, शाहपुर, बहुवन मदार माझा, भौरीगंज एवं नंदौर सहित 72 गांव इसकी चपेट में आ जाएंगे। बाढ़ के पानी में घर, मकान गिरने के साथ ही लाखों एकड़ भूमि में लगी गन्ना, धान एवं मक्का आदि की फसलें नष्ट हो जाएंगी। इसे लेकर लोगों की बेचैनी काफी बढ़ गई है।
बांध कटने को लेकर तहसील क्षेत्र में 11 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इसमें पाल्हापुर, गौरा सिंहपुर, भंभुआ, चकरौत, शाहपुर, भटपुरवा, पसका, भौरीगंज, चरसड़ी, एवं रेवारी शामिल हैं। इन चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती करते हुए सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है।