एल्गिन-चरसड़ी बांध के तीन स्पर कटने के बाद अब घाघरा का पानी सीधे बांध से टकराने लगा है। हालत यह है कि नदी की एक लहर के सीधे बांध से टकराने के बाद बालू से बना बंधा किसी भी समय कट सकता है। जिसके डर से लोग अपने-अपने गांवों को छोड़ बंधे पर आ गए हैं। वहीं दो दिन पहले तक जो कार्यदायी संस्था बंधे के बचाव में लगी थी, वह भी यहां से अपना काम छोड़कर जा चुकी है।
रायपुर गांव का वजूद मिटाने के बाद अब घाघरा के पानी ने अपना रुख गोंडा की ओर मोड़ दिया है। नदी के पानी की चपेट में आने से एल्गिन-चरसड़ी बांध के तीन स्पर पूरी तरह से कटकर नदी में समा चुके हैं। जिससे इसका पानी तीन साल पहले बनाए गए बालू के बंधे से टकराना शुरू हो गया है। आने वाले 24 घंटे बंधे के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। जिसके डर से प्रशासनिक मशीनरी ने नदी के मुहाने पर आने वाले तमाम गांवों को डुग्गी पिटवाकर खाली तो करा दिया है लेकिन गांव से बाहर आए लोगों को किसी तरह की कोई व्यवस्था अभी तक नहीं मुहैया कराई गई है। लोगों की मानें तो अगर एल्गिन-चरसड़ी बांध कटता है तो इससे करनैलगंज के मांझा इलाके में रहने वाले 72 गांवों और उससे जुड़े 600 मजरे प्रभावित होंगे। जिसका असर यहां की एक लाख आबादी पर पड़ेगा। वहीं नदी के मुहाने पर बसे काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुईंया, नकहरा, गौरासिंहनापुर, बमबमपुरवा, रेक्सडिय़ा, पूरेअजब, पूरे अंगद, भटपुरवा, दिवली, पाल्हापुर गांव के पूरी तरह से जलमग्न होने के आसार दिखाई पडने लगे हैं। जिसे लेकर लोगों की बेचैनी नदी की बांध में लगने वाली तेज रफ्तार ठोकर से बढने लगी है। बुधवार को पूरे दिन प्रशासनिक अधिकारी बंधे को बचाने की जुगत में कहीं बालू भरी बोरियों से पानी को रोकने की कवायदों में जुटे रहे तो कहीं बंबोक्रेट व जंबोगेट से पानी की दिशा को मोड़ने में। लेकिन पानी के तेजरफ्तार वेग के आगे उनकी सारी मंशाएं धरी की धरी रह गईं।