करनैलगंज कोतवाली में करनैलगंज के तहसीलदार समेत आठ लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमें जालसाजी व धोखाधड़ी कर दलित की भूमि को पिछड़ी जाति का दिखाकर दस्तावेज तैयार कर बैनामा कराने, जबरन जमीन पर कब्जा व उत्पीड़न करने के साथ ही तहसीलदार द्वारा बिना तथ्य के ही खतौनी से नाम काटने का आरोप लगाया गया है।
मामला करनैलगंज तहसील के ग्राम बसेरिया के मजरा पठानपुरवा का है। यहां के निवासी महावीर प्रसाद ने कोतवाली करनैलगंज में मुुकदमा दर्ज कराया है। जिसमें कहा गया है कि वह धोबी जाति का है। गांव की जमीन रामसमुझ के नाम से दर्ज थी।
रामसमुझ द्वारा की गई वरासत के आधार पर उनकी मृत्यु के बाद भूमि महावीर व उनके दो भाइयों रघुवीर व भारत पुत्र गुरुबचन के नाम से दर्ज हो गई। उसी बीच गांव के कुछ लोगों ने मृतक रामसमुझ को कौम लोध दर्ज कराकर जमीन का बैनामा करा लिया।
उसके बाद तहसीलदार करनैलगंज द्वारा उसके नाम को दर्ज खतौनी से हटाकर तथ्यहीन आदेश कर अमलदरामद कर दी। जब उसने आपत्ति की तो खतौनी बहाल कर दी गई। फिर उसके विपक्षियों के प्रभाव में आकर बीती 28 जून को आदेश निरस्त कर पुुुन: खतौनी से नाम हटा दिया गया।
उसका आरोप है कि बार-बार आदेश में तथ्यहीन परिवर्तन की शह पर उसके विपक्षियों ने बीती छह अगस्त को उसके खेत में लगी मक्के की फसल को जोत दिया और मना करने पर गालीगलौज कर मारपीट की।
शिकायत करने पर पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया। तब उसने न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया। जिसमें पुलिस ने तहसीलदार करनैलगंज तथा ग्राम बसेरिया निवासी इबरार, इकराम, अकील खां, जावेद, सद्दाम, परवेज, शकील खां के विरुद्ध जालसाजी, धोखाधड़ी व दलित उत्पीड़न आदि का मुकदमा दर्ज किया है। कोतवाल अभय प्रताप मल्ल ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की जांच कराई जा रही है।