कहते हैं जिसका रखवाला भगवान होता है, उसे मारने के चाहे जितने भी प्रयास क्यों न हों, वह जिंदा बच जाता है। कुछ ऐसा ही वाक्या गुरुवार को कटराबाजार के शांतीनगर इलाके में देखने को मिला। जहां एक बोरी में बंद नवजात बच्ची की सांस आठ घंटे तक चलती रही।
बच्ची के रोने की आवाज सुनकर सुबह चारा काटने गए एक व्यक्ति की निगाह जब उस बोरी पर पड़ी तो वह अवाक रह गया। लोगों की मौजूदगी में बोरी को खोलकर बच्ची को सकुशल बाहर निकाला गया। जिसके बाद उसे सीएचसी ले जाया गया। जहां बच्ची को टीके लगाए गए। फिलहाल बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ बताई जा रही है।
आज जहां बेटियों का रुतबा कहीं से भी बेटों से कम नहीं है, वहीं बेटियों के साथ होने वाली हैवानियत आज भी जगजाहिर है। गुरुवार को कटराबाजार से आर्यनगर जाने वाले रास्ते पर शाहजोत गांव के नजदीक सड़क किनारे ही ऐसी ही एक नवजात बच्ची को बोरी में बांधकर उसे मरने के लिए फेंक दिया गया। लेकिन ऊपर वाले का करम देखिए कि आठ घंटे बाद जब बोरी का मुंह खोलकर बच्ची को बाहर निकाला गया तो वह सकुशल जिंदा निकली।
गुरुवार की सुबह खेतों में चारा काटने गए शाहजोत गांव के रहने वाले एक व्यक्ति को बच्ची के रोने की आवाज सुनाई पड़ी तो वह जगह पर आया, जहां बोरी पड़ी हुई थी। इसके बाद वहां ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।
बच्ची को बोरी से निकालने के बाद उसे सीएचसी कटराबाजार लाया गया। जहां स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्ची को कुछ टीके लगाए। सीएचसी कटराबाजार की एएनएम उर्मिला श्रीवास्तव की मानें तो बच्ची को देखकर यह लगता है कि उसे सात से आठ घंटे पहले बोरी में बांधकर फेंका गया था।
शाहजोत गांव के नजदीक बोरे में बंद मिली नवजात बच्ची को इसी गांव के मजरा पहवारनपुरवा गांव निवासी रामसजन यादव ने गोद ले लिया है। रामसजन यादव की शादी को कई साल बीत चुके हैं। लेकिन अभी तक उन्हें कोई संतान नहीं हुई है।
गुरुवार को बच्ची को गोद लेकर उनका पूरा परिवार निहाल हो गया। रामसजन की पत्नी उर्मिला ने बताया कि उनके जीवन में यह बच्ची नई रोशनी लेकर आई है। बच्ची को गोद लेने की सारी प्रक्रिया वह आगे पूरी करती रहेंगी।