गोंडा। आसमान पर भागते बादल रूठे नजर आ रहे हैं। कई बार बादल घेरने के बाद भी बारिश नहीं हो रही है। बारिश न होने से देर से लगाई गई धान की फसलें सूखने लगी हैं। माना जा रहा है कि थोड़े दिन ऐसे मौसम रहा तो उत्पादन घट जाएगा। इस समय सावन का माह है, लेकिन आसमान से बारिश की फुहार गिरने के बजाये आग बरस रही है। देखा जाए तो बीते दो वर्षों से इस माह अधिक बरसात हुई है लेकिन जुलाई माह के शुरुआत में लगातार तीन दिनों तक मूसलाधार बारिश हुई, लेकिन बाद में थम गई। यदि पूरे माह बीच-बीच में बारिश होती रहती तो फसल के लिए लाभदायक होता। अधिक बारिश हो जाने के बाद से पूरे माह आंशिक बारिश होने से किसानों को अधिक फायदा नहीं हुआ। सावन में मौसम की कड़की देख किसान हैरान परेशान हैं वहीं इससे कृषि विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। बारिश कम होने से किसान अपने नुकसान को लेकर जहां चिंतित है वहीं कृषि विभाग व कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसलों को बचाने के लिए सिंचाई करने की सलाह दी है। बदले मौसम के मिजाज को देख कृषि विशेषज्ञों ने भी माना की बारिश न होने से उत्पादन पर असर पड़ेगा।
जिले में हुई बारिश पर एक नजर
माह वर्ष 2017 वर्ष 2018 वर्ष 2019
जून 196.6 38.7 447.5
जुलाई 374.2 248.8 478.4
अगस्त 182.0 396.8 0.00
नोट-बारिश के आंकड़े मिली मीटर में हैं।
1.83 लाख हेक्टेयर में बोई गई फसलें
जिले में खरीफ सीजन में कुल 1.83 लाख हेक्टेयर में फसलों की बोवाई की गई है। 1.29 लाख 154 हेक्टयर क्षेत्रफल में धान, 47.53 हजार हे.में मक्का, छह हजार हेक्टेयर में अरहर, 830 हेक्टेयर में उर्द, 381 हेक्टेयर में तिल, 19हे. में मूंगफली व नौ हेक्टेयर में मूंग की बोआई की गई है। कृषि विभाग ने जिले में 97.93 फीसद रकबे में खरीफ फसलों की बोवाई का दावा किया है।
बोले किसान, बारिश न हुई तो डूब जाएगी गाढ़ी कमाई
गोंडा। बारिश न होने से किसान परेशान हैं। बारिश न होने से धान की सूखती फसलों को देख किसान आसमान निहार रहे हैं। किसानों का कहना है कि बारिश थोड़े दिन और न हुई तो गाढ़ी कमाई भी डूब जाएगी। किसान शत्रोहन यादव ने बताया कि धान की फसलें जो अब लगाई जा रही हैं वो बारिश न होने से सूखने लगी हैं। किसान जगराम का कहना है कि जो खेत ऊंचाई पर है उन पर बारिश न होने से बुरा असर पड़ रहा है। कम बारिश से किसानों को सीधा नुकसान होगा।
कृषि विशेषज्ञों की राय किसान फसलों की सिंचाई करें
गोंडा। जिले में बारिश न होने से किसानों के साथ कृषि विशेषज्ञ में चिंतित है। इस बारे में कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. उपेन्द्र नाथ सिंह ने बताया कि अभी तो फसलों को बहुत नुकसान नहीं है लेकिन ऐसे मौसम एक सप्ताह और रहा तो उत्पादन घटना तय है। उन्होंने बताया पिछैती प्रजाति के धान की खेती करने वाले जिन किसानों ने देर से धान लगाया है वह फसलें बारिश न होने से सूख रही हैं। उन्होंने किसानों को धान की फसलों की सिंचाई करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि किसान धान की फसलों को सूखने से बचाने के लिए खेत की सिंचाई कर दें बाद में बारिश होने से फसलों में सुधार हो जाएगा।
बोआई का लक्ष्य पूरा, बारिश का धान पर असर
जिले में शासन की ओर से जो खरीफ फसलों की बोआई का लक्ष्य दिया गया था वह पूरा हो चुका है। जिले में बारिश कम हुई है जिससे धान की फसलों पर आंशिक असर पड़ा है। बदलते मौसम में धान की फसलों को बचाने के लिए किसान सिंचाई करें। -जेपी यादव, जिला कृषि अधिकारी गोंडा।