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जियो टैगिंग न होने से नहीं हो पा रही 45 लाख पेड़ो की निगरानी

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गोंडा। भले ही बरसात का मौसम शुरू होने से पहले जुलाई में पौधरोपण का कार्यक्रम चलाकर प्रति वर्ष लाखों नये पौधे रोपित किये जाते हों। लेकिन रखरखाव व देखभाल न होने के कारण हर वर्ष कई लाख पौधे सूख जा रहे हैं। रोपे गये एक-एक पौधे की निगरानी के लिए बनाई गयी जियो टैगिंग की व्यवस्था भी लक्ष्य के सापेक्ष बहुत कम की गई।
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जियो टैगिंग के माध्यम से प्रत्येक पौधे की देख-रेख, प्रजाति, खाद-पानी की स्थित के साथ साथ कितने पौधे सूख गये उनका भी विवरण अपलोड करना रहता है। जिससे पौधे की निगरानी की जा सके और सूख गये पौधे के स्थान पर नये पौधे रोपे जा सकें। यही कारण है कि जिले में रोपे गए 45 लाख पौधे निगरानी से वंचित रह गए हैं।
जनपद में हरियाली लाने के लिए शासन द्वारा जिले में 40 लाख 88 हजार 680 पौधे लगाये जाने का लक्ष्य दिया गया था। जिसके सापेक्ष वन विभाग ने विभिन्न विभागों व संगठनों के सहयोग से 44 लाख 30 हजार 583 पौधे लगवाये लेकिन देख-रेख के लिये होने वाली जिओ टैगिंग की व्यवस्था न होने के कारण या तो सूख जा रहें हैं या जानवरों का निवाला बन जा रहे हैं। प्रभागीय वनाधिकारी राजकुमार त्रिपाठी ने बताया कि पौधों के देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभाग को दी गयी है। जो पौधों सूख जा रहे हैं उनके स्थान पर नये पौधे रोपे जा रहे हैं। पौधों के संपूर्ण निगरानी के लिए जिओ टैंगिंग कराई जा रही है।
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