गोंडा। रसोई गैस की किल्लत से जिले के परिषदीय व एडेड विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की भोजन की थाली पर भी संकट गहराने लगा है। परेशानी के कारण जिले में संचालित 2689 स्कूलों में करीब 3.9 लाख बच्चों को मिलने वाला मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) का काम भी प्रभावित हो रहा है। अधिकांश स्कूलों में गैस सिलिंडर खत्म हो जाने के बाद शिक्षकों को गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जबकि कई विद्यालयों में लकड़ी का चूल्हा जलाकर किसी तरह बच्चों के लिए दोपहर का भोजन तैयार किया जा रहा है।
बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया कि जिले के अधिकांश विद्यालयों में गैस खत्म हो चुकी है। जिला पूर्ति अधिकारी से कई बार अनुरोध कर 7700 सिलिंडरों की मांग की गई है, लेकिन अब तक आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में स्कूलों में वैकल्पिक साधनों से मिड-डे मील बनवा कर बच्चों को परोसा जा रहा है।
लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा भोजन
इटियाथोक के प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर के प्रधानाध्यापक चंद्र प्रकाश वर्मा ने बताया कि पिछले पांच दिनों से एजेंसी के चक्कर लगाने सिलिंडर नहीं मिल पाया है। ऐसे में समय बर्बाद करने की जगह अब बच्चों के लिए भोजन लकड़ी का चूल्हा जला कर भोजन तैयार कराया जा रहा है।
चार दिन से गैस खत्म, आदेश का इंतजार
पूर्व माध्यमिक विद्यालय अर्जुनपुर के प्रधानाध्यापक देव प्रकाश मिश्र के अनुसार चार दिन से स्कूल में गैस उपलब्ध नहीं है। एजेंसी ने विभाग से आदेश आने के बाद ही गैस देने की बात कही है। फिलहाल लकड़ी के सहारे भोजन बनवाया जा रहा है।
कागजों पर डिलीवरी फुल, सिलिंडर खाली
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बसंतपुर राजा के बृजेश सरोज ने बताया कि रिकॉर्ड में 12 सिलिंडर की डिलीवरी दिखाई जा रही है, जिससे नया सिलिंडर बुक नहीं हो पा रहा है। इस गड़बड़ी की सूचना खंड शिक्षा अधिकारी को दे दी गई है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।