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जिले में सूखे जैसे हालात

Mon, 20 Jul 2015 11:31 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में बारिश न होने से सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। इससे काश्तकार परेशान हैं। किसानों का मानना है कि यदि ऐसे ही कुछ दिन और रहा तो धान की फसल जहां रोपाई से पिछड़ जाएगी, वहीं जिन लोगों ने धान की रोपाई करा दी है, उनकी फसल भी नष्ट हो जाएगी।
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किसान इस बार के मौसम को देखते हुए खरीफ फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका जता रहे हैं। वहीं कृषि विशेषज्ञों ने भी किसानों की बात से इत्तेफाक रखते हुए उन्हें सतर्क रहने के साथ ही फसल चक्र में बदलाव करने की नसीहत दी है। अभी तक जिले में जरूरत के हिसाब से मामूली बारिश हुई है। अब तक हुई बरसात मौजूदा फसलों के लिए नाकाफी है।

पिछले साल जून में 110 व जुलाई में 308 मिलीमीटर बारिश हुई थी। जबकि इस बार काफी कम बारिश होने से किसानों के खेती-किसानी के अर्थशास्त्र को गड़बड़ कर दिया है।
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जिले में पिछले चार साल में हुई बारिश पर एक नजर
वर्ष                          मिली मीटर में
2011                  1271.1
2012                 1378.4
2013                 1620.8
2014                  979.8

वर्ष 2015 में अब तक हुई कुल बारिश
माह                      मिलीमीटर में  
जनवरी  -               25.2
फरवरी   -               12.6
मार्च      -                54.4
अप्रैल    -                 51.0
मई       -                 64.6
जून      -                 70.0
जुलाई   -                 15.0


जिले में खरीफ की फसलों को नहर व नलकूपों ने भी गच्चा दे दिया है। नहरों में पानी न आने व नलकूपों में गड़बड़ी के चलते आखिरी छोर तक पानी पहुंचना तो दूर आसपास भी सिंचाई करना संभव नहीं है। नहरों के माइनर सूखे पड़े हैं। विभाग अभी तक नहरों के गैप तक को नहीं भरवा सका है।

ऐसे में तमाम क्षेत्र में नहरों व माइनर से किसानों को फायदा तो नहीं हुआ, बल्कि नुकसान काफी उठाना पड़ा है। नहरों व माइनरों की खाईं ने किसानों के खेत की दूरियां बढ़ाने के साथ खेती के संसाधनों को खेतों में जाने से रोक दिया। माइनर अवरोध बन गए।

इसके कारण अब किसान अपना पंपिंगसेट भी खेत ले जाने से वंचित हो गए हैं। दूसरी ओर जो नलकूप बने हैं, उसमें कहीं बिजली तो कहीं यांत्रिक दोष तो कहीं कुलाबों व नालियों में गड़बड़ी के कारण नलकूप सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।

बारिश न होने से किसानों में हाहाकार मचा है। काश्तकारों को इस बार मौसम को देखकर अपनी फसल बचाने की चिंता सता रही है। जिन किसानों ने धान की रोपाई नहीं की है, उन्हें बारिश होने का इंतजार है। जबकि जिन किसानों ने पंपिंग सेट से खेत में पानी भरवा कर धान की रोपाई कर दी थी, वह अब बारिश न होने के अभाव में सूख रही है।

भदुआ तरहर गांव के किसान शत्रोहन यादव ने बताया कि दस बीघा में पंपिंग सेट से पानी भरकर धान की रोपाई करायी थी। लेकिन अब बारिश न होने से धान की फसल सूखने लगी है। मंहगा डीजल खरीद कर धान की फसल में कितनी बार सिंचाई की जाए। अब बारिश न हुई तो धान की फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा।

ग्राम पथवलिया निबिहा के किसान राकेश ओझा ने बताया कि जहां सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां धान की रोपाई पिछड़ रही है। 10 दिन बारिश और न हुई तो धान की रोपाई करने से किसानों की घर की पूूंजी भी चली जाएगी।

इस समय बारिश का पीक समय चल रहा है। लेकिन बारिश का न होना चिंता का विषय है। मौसम के विक्षोभ  में परिवर्तन होने का असर बारिश पर पड़ रहा है। ऐसा थोड़े समय तक और रहा तो करीब 40 से 50 फीसदी तक खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बन जाएगी। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे अपने धान की फसलों में पानी भरवाते रहें, ताकि धान के पौधे सूखने न पाएं। सिंचाई के बाद यूरिया की हल्की टाप ड्रेसिंग कर दें।  - डॉ. उपेंद्र नाथ सिंह, कृषि विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्र गोंडा
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