नौ नवंबर 2012 का वह दिन लोगों को आज भी याद है, जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोंडा शहर को सीवर लाइन की सौगात देने के लिए इस प्रोजेक्ट को अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए इस पर जल्द ही काम शुरू कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद तीन साल बीतने को हैं, लेकिन योजना पर काम शुरू होना तो दूर, इसका इस्टीमेट तैयार करने में भी जल निगम विभाग को पसीना छूट रहा है।
यही वजह है कि तीन साल में पांच बार रिवाइज होने वाले इस्टीमेट से इसकी लागत 175 करोड़ से बढ़कर 329 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। जबकि कहानी जहां से शुरू हुई थी, आज भी वहीं पर अटकी हुई है, जिसका खामियाजा लोगों को गंदगी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
करीब चार लाख आबादी वाले गोंडा शहर में न तो गंदे पानी की निकासी के लिए नालों की कोई ठोस व्यवस्था है और न ही कोई सीवर लाइन।
इसके कारण बारिश के अलावा लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी शहर में जहां-तहां देखने को मिल जाता है। बारिश के दिनों में यही गंदा पानी ओवरफ्लो हुए नालों से लोगों के घरों तक में घुस जाता है।
इसके लिए काफी समय से शहर में सीवर लाइन डाले जाने की बातें हो रही हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इसका आश्वासन अपनी घोषणाओं में स्थानीय लोगों को दे चुके हैं। इसके बावजूद धरातल पर कहीं भी इसका काम होता नहीं नजर आ रहा।
तीन साल पहले भारत सरकार की ओर से इसका प्रस्ताव यूडीआईएसएमटी (अरबन डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर इन स्माल टाउन) योजना के तहत जल निगम से मांगा गया था।
इसके बाद बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम ने लखनऊ की संस्था टेक्नोविजडम की मदद से इसका प्रस्ताव तैयार करवाया, जिसमें प्रोजेक्ट की कुल लागत 175 करोड़ रुपये बताई गई।
काफी समय तक योजना पर कोई काम शुरू न होने के कारण इसका प्रोजेक्ट चार और बार रिवाइज हुआ, जिसकी मौजूदा कास्ट पहले तैयार किए इस्टीमेट से 154 करोड़ बढ़कर 329 करोड़ रुपये हो गई है।
लेकिन सवाल अभी भी इसी बात का है कि बार-बार इस्टीमेट रिवाइज किए जाने के बावजूद काम कब चालू होगा, इसका पता जल निगम के भी किसी अधिकारी को नहीं है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता राजेंद्र सिंह से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि सीवर लाइन की योजना मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल है, जिसका नए सिरे से वह इस्टीमेट तैयार कर रहे हैं।
नए इस्टीमेट में इसकी कुल लागत 329 करोड़ रुपये हो गई है। हालांकि अभी इस्टीमेट पूरा तैयार नहीं हो पाया है। जैसे ही यह तैयार हो जाता है, इसे वह स्वीकृति के लिए शासन को भेज देंगे। इससे ज्यादा वह इस मसले पर कुछ नहीं बता सकते।