गोंडा। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए नई कवायद शुरू की जाएगी। अब सरकारी अस्पतालों में 10 साल का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों को भी बतौर एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया जा सकेगा। इसके लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की ओर से नए नियम जारी किए गए हैं।
मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षकों की भारी कमी है। कई बार विज्ञापन जारी करने के बावजूद भी अभी तक फैकल्टी पूरी नहीं हो सकी। एमबीबीएस के दूसरे बैच की पढ़ाई शुरू करने की अनुमति मिल गई है। अब एनएमसी के नियमों में बदलाव से चिकित्सा शिक्षकों की कमी दूर हो सकेगी।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थानें ने बताया कि सरकारी अस्पताल में 10 वर्षों तक सेवा देने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक एसोसिएट प्रोफेसर बन सकते हैं। इसके लिए उनके मुख्य विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र देना होगा। वहीं दो वर्ष के अनुभव रखने वाले पीजी डिग्री धारक डॉक्टर सीनियर रेजीडेंट को सहायक प्रोफेसर बनाया जा सकता है। अनुभव के आधार पर चिकित्सकों को अपनी योग्यता व शोधपत्र भी देना होगा।
यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व जिला स्तरीय अस्पतालों के डॉक्टर को मेडिकल कॉलेज में तैनात करने के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र बनवाना होगा।