जिला अस्पताल में प्रदर्शन करता तीमारदार। -संवाद
गोंडा। बाबू ईश्वर शरण जिला चिकित्सालय को स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का हिस्सा बनने के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होने की उम्मीद थी मगर डॉक्टरों की लेटलतीफी शासन की मंशा पर पानी फेर रही है। बुधवार को डॉक्टर का इंतजार करते-करते मरीजों व तीमारदारों के सब्र का बांध टूट गया तो वे ओपीडी के सामने ही जमीन पर बैठकर धरना देने लगे। मामला बढ़ता देख मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी ने फोन करके डॉक्टर को बुलाया तब जाकर इलाज शुरू हुआ।
जिला अस्पताल में एक दिन अवकाश के बाद बुधवार को ओपीडी शुरू हुई तो मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। लंबी लाइन में लगकर पर्चा बनवाने के बाद मरीज डॉक्टर का इंतजार करने लगे। दोपहर 12 बजे तक फिजीशियन के नहीं पहुंचने पर 13 नंबर ओपीडी के सामने तमाम मरीज व तीमारदार धरने पर बैठ गए।
मोकलपुर के राम अशोक पांडेय ने बताया कि अपनी बेटी को दिखाने के लिए सुबह नौ बजे से ओपीडी में बैठे हैं मगर डॉक्टर ही नहीं आए। इटियाथोक की जनक दुलारी सहित अन्य लोगों ने बताया कि तीन घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं। मामला बढ़ता देख मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. कुलदीप पांडेय ने मरीजों को समझाकर शांत कराया। फिर फिजीशियन को कॉल करके बुलाया तो ओपीडी शुरू हुई।
मेडिकल कॉलेज का हिस्सा होने के बावजूद अभी तक जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। ओपीडी के सामने बैठने की व्यवस्था न होने के कारण मरीजों व तीमारदारों को जमीन पर बैठना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. कुलदीप पांडेय का कहना है कि सुबह आठ बजे से ओपीडी शुरू करने का निर्देश है। मैं खुद समय से ओपीडी में बैठ जाता हूं और अन्य डॉक्टरों को भी निर्देश दिया गया है कि समय से मरीजों का इलाज करें। लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर से कारण पूछा जाएगा।