जिला अस्पताल में मंगलवार को इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात एक डाक्टर ने रेलवे के वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक से न सिर्फ अभद्रता की बल्कि उन्हें यह कहकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी से बाहर कर दिया कि वह रेलवे में हैं, इसलिए उनका इलाज यहां नहीं हो सकता।
जिसके बाद स्टेशन अधीक्षक को अपना इलाज शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में कराना पड़ा। दरअसल लखनऊ में एक मीटिंग में शामिल होने जा रहे थे लेकिन रास्ते में दिल का दौरा पड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल लाया गया था। मामले में वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक की ओर से इसकी तहरीर कोतवाली नगर में दी गई है।
मंगलवार को पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम आलोक सिंह ने लखनऊ में एक मीटिंग बुला रखी थी। जिसके लिए गोंडा रेलवे से वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक एएन मिश्र व एरिया मैनेजर शिवेन्द्र सिंह इंटरसिटी ट्रेन से लखनऊ जा रहे थे।
टे्रन जैसे ही गोंडा रेलवे स्टेशन से कुछ आगे बढ़ी कि वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक एएन मिश्र को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया। एएन मिश्र को पसीने से तर-बतर देख एरिया मैनेजर ने आनन-फानन में ट्रेन को कचहरी स्टेशन पर रुकवा दिया और तत्काल उन्हें एबुंलेंस से इलाज कराने के लिए भेजा। इसी दरम्यान वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक एएन मिश्र का बेटा प्रदीप मिश्र भी आ गया और वह उन्हें लेकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचा।
यहां जिला अस्पताल के इमरजेंसी रूम में वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक का उपचार होता, इतने में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आलोक शुक्ल वहां आ गए और वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक को देखते ही उन्हें पहचान गए।
उन्होंने कहा कि वह यहां करने आए हैं, वह तो रेलवे में हैं, इसलिए अपना इलाज भी वहीं जाकर कराएं। जिसपर उन्होंने डाक्टर से नम्रता के साथ उपचार करने को भी कहा। लेकिन वह कुछ पुरानी बातों को लेकर उनपर उखड़ पड़े और अभद्रतापूर्ण व्यवहार करने लगे। इतना ही नहीं अपनी बात कहते हुए उन्हें उन्हें जिला अस्पताल की इमरजेंसी से बाहर भी कर दिया।
जिसके बाद हाई ब्लड प्रेशर और सीने में तेज दर्द की शिकायत से पीड़ित वरिष्ठ स्टेशन अधीक्षक को अपना उपचार शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में कराना पड़ा। मामले में एएन मिश्र की ओर से इसकी तहरीर कोतवाली नगर में दी गई है।