ग्राम पंचायत जानकी नगर निवासी परमानंद गुप्ता, शिव बहादुर सिंह, मालती सिंह, गीता पांडेय, संतोष कुमार श्रीवास्तव, गोविंद कुमार शुक्ला, मनोज कुमार तिवारी, जग प्रसाद मिश्रा व गोकरन प्रसाद मिश्रा ने वर्ष 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की थी। तब उन्होंने कहा था कि गोंडा-बहराइच राज्य मार्ग पर ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान उनकी जमीन पर गिट्टी, मौरंग सहित अन्य निर्माण सामग्री डंप की गई। सर्विस रोड भी बना दी गई। उप्र ब्रिज कॉर्पोरेशन, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग और जिलाधिकारी ने जमीन का निर्धारित सर्किल रेट से मुआवजा दिलाने की मांग अनसुनी कर दी।
सभी पक्षों को सुनने के बाद एक जुलाई 2024 को न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह ने जिलाधिकारी गोंडा को शिकायत सुनने, दो सप्ताह में याचिका कर्ताओं की जमीन से निर्माण सामग्री हटवाने और सर्विस रोड में आने वाली भूमि का सर्किल रेट से मुआवजा दिलाने का आदेश दिया था। एक साल बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
इससे निराश होकर भूस्वामी परमानंद गुप्ता, शिव बहादुर सिंह व मालती सिंह ने जिलाधिकारी को पक्षकार बनाकर अवमानना याचिका दायर कर दी। 19 सितंबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।