गोंडा। सरकारी क्रय केंद्र पर 2060 रुपये क्विंटल धान खरीद करने की योजना पर बिचौलिए हावी रहे। जिले के क्रय केंद्रों पर खरीद की जटिलता से परेशान अधिकांश किसान को बिचौलियों के हाथों औने पौने दाम में धान बेचना पड़ा।
सरकारी खरीद शुरू डेढ़ माह बाद क्रय केंद्रों पर अभी तक 30 फीसदी धान भी नहीं खरीदा जा सका। जिले के करीब 80 फीसदी किसान अपना धान बेच चुके हैं। पहली नवंबर से सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद शुरू की गई। वर्ष 2022-23 में शासन की ओर से 98000 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी 27,797 मीट्रिक टन धान की ही सरकारी खरीद हो सकी।
किसानों ने बयां किया दर्द
किसानों ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेच पाना बहुत मुश्किल है। पहले हाईब्रिड धान खरीदने के लिए बीज का जीएसटी सहित बिल मांगा जा रहा था, और फिर धान में नमी बताकर सुखाकर लाने को कहा जा रहा। संझवल के किसान सांवली मोहन ने बताया कि दो बार क्रय केंद्र से वापस किया गया, जिसके कारण उन्होंने बाजार में 1700 के भाव से धान बेच दिया। किसान गंगाराम ने बताया कि क्रय केंद्रों पर सिर्फ उन्हीं का धान बिक पाता जो क्रय केंद्र प्रभारी से करीब होते हैं। हम लोगों को तो बाजार में ही बेचना पड़ा है।
घोषणा पत्र मंगवाकर खरीद के निर्देश
डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि किसानों के धान खरीद को लेकर क्रय केंद्र प्रभारियों को सख्त निर्देश दिया गया है। किसी भी कारण किसानों को क्रय केंद्र से वापस नहीं किया जा सकता। बीज का बिल न मांगकर एक घोषण पत्र भरवाकर खरीद करने का निर्देश दिया गया। किसानों से अपील की जा रही है कि वह अपना धान सरकारी क्रय केंद्रों पर ही बेंचे। असुविधा होने पर उन्हें फोन कर सकते हैं।
कोटे की दुकान पर की जांच
शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने झंझरी ब्लॉक के परेड सरकार स्थित कोटे की दुकान का निरीक्षण किया। हालांकि यहां पर किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं पाई गई। इस दौरान डीएसओ कृष्ण गोपाल पांडेय सहित अन्य मौजूद रहे।