छह साल पहले आग से हुई एक घटना के मामले में पावर कॉर्पोरेशन के एसडीओ व जेई के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा ने जिलाधिकारी गोंडा को 10 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
छह साल पहले धानेपुर के रेतवागाड़ा गांव निवासी अमरेंद्र प्रताप सिंह व बृजेंद्र बहादुर सिंह के सागौन के बाग में बिजली के हाईटेंशन तारों से आग लग गई थी। जिसकी शिकायत अमरेंद्र व बृजेंद्र ने सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा निदेशालय से की।
जिस पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने जब मौके का मुआयना किया तो पता चला कि जिस बिजली की लाइन से अग्निकांड की घटना हुई है, उसकी लाइन में कई खंभों पर लगे रहने वाले क्रॅासआर्म ही नहीं है। जबकि बिजली के तार भी काफी हद तक नीचे झूल रहे हैं।
इस पर विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने मामले में क्षेत्रीय एसडीओ अमर सिंह व जेई डीके यादव की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोनों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की।
वहीं डीएम ने बाग में आग से हुए नुकसान का आकलन कराया तो पता चला कि घटना में दोनों लोगों को 3.73 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब पीड़ितों को क्षतिपूर्ति नहीं मिली तो इसका वाद अमरेंद्र प्रताप सिंह व बृजेंद्र बहादुर सिंह ने उच्च न्यायालय में दाखिल किया। जहां से जिलाधिकारी को मामले में पीड़ितों को तीन महीने में क्षतिपूर्ति के आदेश व दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया।
लेकिन इस आदेश के बाद भी पीड़ितों को न तो क्षतिपूर्ति मिली और न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस पर अधिवक्ता प्रशांत ने उच्च न्यायालय में अवमानना का वाद दाखिल किया। जिसकी बीते महीने सुनवाई करते हुए जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा ने डीएम गोंडा को 10 फरवरी को तलब किया है।
वहीं उच्च न्यायालय के तलबी फरमान के बाद ही एक फरवरी को पीड़ित अमरेन्द्र प्रताप सिंह व बृजेंद्र बहादुर को क्षतिपूर्ति के तौर पर 3.73 लाख रुपये का चेक अवमुक्त कर दिया गया।