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उल्लास से मनी दिवाली

Sun, 30 Oct 2016 06:40 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
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फुलझड़ी जलाती युवतियां - फोटो : अमर उजाला
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जिले भर में रविवार को दीपावली का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। शाम होते ही लोगों के घर-आंगन बिजली की रंग बिरंगी झालरों, रंगीन मोबत्तियों और मिट्टी के दीपकों की रोशनी से जगमगा उठे। लोगों ने अपनी सुख समृद्धि के लिए मंदिरों और अपने घरों में गणेश व लक्ष्मी की विधिवत पूजा-अर्चना की। शाम होते ही तरह-तरह के पटाखों के धमाकों से कोना-कोना गूंज उठा। लोगों की ओर से मिठाई आदि का उपहार देकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। 
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दीपावली को दीपों का पर्व कहा जाता है। लोगों ने रविवार को दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया। दीपावली को लेकर लोगों ने जोरदार तैयारियां की थीं। पूरे दिन लोग दीपावली को लेकर इंतजाम में जुटे रहे। शाम होते ही लोगों ने अपने घरों पर सजाई गईं रंग बिरंगी झालरों का स्विच ऑन कर घर को जगमग कर दिया। इसके अलावा लोगों ने अपने घर की छतों व घर में रंगोली बनाकर उसे मोमबत्तियों व दीपों से सजाकर जगमगा दिया।

रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा शहर व गांव का इलाका रोशन दिखा। महिलाएं और बच्चे शाम को ही दीपक व मोमबत्तियों को जलाने में जुट गए। लोगों ने अपने घरों और पास के मंदिरों में जाकर गणेश भगवान व लक्ष्मी देवी की पूजा कर अपनी खुशहाली की कामना की। बच्चों ने रोशनी कर खूब पटाखे जलाए।
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राकेट और फुलझड़ी छुड़ाकर बच्चों ने खूब मस्ती की। लोगों ने दीपावली पर एक-दूसरे को मिठाई, खील बतासा आदि उपहार देकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उपहार देकर शुभकामनाएं देने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। 

शाम होते ही हर तरफ पटाखों की गूंज सुनाई देने लगी, जिसका सिलसिला देर रात तक चलता रहा। दीपावली पर रविवार की रात करीब 50 लाख रुपये के पटाखे जला दिए गए इस दौरान क्या बच्चे, क्या जवान सब ने पटाखे छोड़ने का आनंद उठाया। कहीं अनार की झरझर करती रोशनी तो कहीं आसमान में रंगीन रोशनी छोड़ते राकेट व फुलझड़ी का मैजिक दिखा। इसके अलावा चटाई और कई तरह के बम गोले के धमाकों से इलाके गूंजते रहे। 

दीपावली पर पटाखे जलाने से जहां लोगों को खूब मजा आया, वहीं इससे हुए प्रदूषण से पशु पक्षियोें को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पटाखों के धमाकों के डर से पशु पक्षी दुबके नजर आए। वहीं उसके धुएं से आसमान व वायुमंडल का वातावरण प्रदूषित महसूस हुआ। शहर में तो कई मोहल्लों में अस्थमा के मरीजों को घर में छिपना पड़ा। 
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