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नियमों की अनदेखी कर जिला पंचायत ने खर्च कर डाले 30 करोड़

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गोंडा में ग्रामीण क्षेत्र की जर्जर सड़क। - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला पंचायत से विकास के लिए कराए गए कार्यों की जांच में बडे़ स्तर पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। वर्ष 2010 से 2015 के बीच करीब 346 परियोजनाओं के कार्य में नियमों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई है। इन कार्यों पर जिला पंचायत ने 30 करोड़ खर्च कर डाले। महालेखाकार की ओर से भेजी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू हुई हो गयी है।
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जांच में उजागर हुई गड़बड़ी के निस्तारण में लापरवाही जिला पंचायत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। फिलहाल जिला पंचायत के जिम्मेदारों की मानें तो विकास कार्य में नियमों की अनदेखी नहीं की गई है। जिला पंचायत से मिलने वाले बजट का खर्च पूरे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में होता है। नियमों के तहत जिला पंचायत का बजट गांवों में खर्च करने से पहले सीमांकन जरूरी है। क्योंकि उन्हीं गावों में कार्य क्षेत्र पंचायतें और ग्राम पंचायतें भी कराती हैं।
इसलिए क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के कार्यों की सीमाओं को तय करके ही जिला पंचायत को कार्य कराया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा जिला पंचायत की ओर से नहीं किया जाता है। वर्ष 2010 से 2015 के बीच 13 वें वित्त आयोग की ओर से करीब 30 करोड़ रुपये का बजट जिला पंचायत ने खर्च किया। इसके लिए ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत के कार्य का सीमांकन भी नहीं कराया गया। कई कार्य बिना कार्य योजना के ही कराए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही बजट को खर्च करने में प्राथमिकता भी तय नहीं की गई।
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नियमों के अनुसार 13वें वित्त आयोग के बजट से पुरानी सड़कों के मरम्मत व अनुरक्षण का कार्य प्राथमिकता में शामिल है। इसके बावजूद बजट नए निर्माण कार्य पर खर्च कर दिए गए। इस तरह बजट को खर्च करने में जिला पंचायत ने हर कदम पर नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं। नियमों को ताक पर रखकर बजट को खर्च किया गया और लगातार पांच सालों तक मनमानी चलती रही। अब महालेखाकार की ओर से की गई टिप्पणी से खलबली मची है।
अनुरक्षण पर दो फीसदी भी खर्च नहीं किया
जिला पंचायत से एक हजार से अधिक सड़कों की मरम्मत की जरूरत होने के बाद भी उन्हें दुरुस्त नहीं कराया गया। 29.24 करोड़ रुपये के बजट में दो फीसदी बजट भी सड़कों के अनुरक्षण और मरम्मत पर खर्च नहीं किया गया। पांच साल में सिर्फ 41 लाख रुपये का बजट ही मरम्मत पर खर्च किए जाने की बात महालेखाकार की जांच में सामने आयी है। इस स्थिति पर महालेखाकार ने कड़ी आपत्ति जताई है।
बिना टेंडर व कोटेशन के खरीदे गए लाखों के सामान
महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दर्शाया है कि ग्राम पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों के तहत कराए गए कार्यों में जिन सामानों की खरीद की गई उसमें वित्तीय हस्तपुस्तिका का भी उल्लंघन किया गया है। बिना कोटेशन व टेंडर की प्रक्रिया अपनाए बिना सामग्री क्रय की गई जो नियम विरुद्ध है।
जिला पंचायत के बीते पांच साल में हुए खर्च पर महालेखाकर की आपत्तियों पर कार्रवाई के निर्देश आयुक्त ग्राम्य विकास से मिले हैं। जिला पंचायत के अपर मुख्य अभियंता को निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। -आशीष कुमार, सीडीओ/मुख्य अधिकारी जिला पंचायत
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