गोंडा। अप्रैल-मई महीने में कोरोना संक्रमण के चरमकाल के दौरान कोविड अस्पतालों में बेड खोजे नहीं मिल रहे थे। वहीं संक्रमण थमने के बाद कोविड अस्पताल अब लगभग खाली हो गए।
जिले में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इस समय सरकारी व निजी अस्पतालों को मिलाकर कुल 335 बेड आरक्षित किए गए थे। जिसमें सरकारी अस्पतालों में 220 बेड तथा निजी अस्पतालों में 115 बेड कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए आरक्षित हैं। लेकिन संक्रमण घटने के साथ इस समय जिले में सिर्फ 6 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।
जिले में कोरोना संक्रमण ने खासा तबाही मचाई। आलम ये रहा कि अकेले दूसरी लहर में ही 187 लोगों ने जान गंवा दिया तथा 7206 लोगों को संक्रमण का दंश झेलना पड़ा। अप्रैल-मई महीने में कोरोना संक्रमण का चरमकाल रहा जिसमें कोविड अस्पतालों में बेड फुल हो गए।
आक्सीजन की भी किल्लत बढ़ी जिस पर निजी अस्पतालों ने तो नो बेड, नो आक्सीजन की नोटिस चस्पा कर दिया लेकिन कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने के बाद कोविड अस्पतालों में बेड खाली हो गए।
इस समय जिले में सरकारी व निजी अस्पतालों को मिलाकर विभिन्न श्रेणियों के 335 बेड आरक्षित किये गए हैं। जिसमें 220 बेड सरकारी अस्पतालों में तथा 115 बेड निजी अस्पतालों में शामिल हैं। जिसमें सिर्फ 6 मरीज भर्ती हैं।
कोरोना संक्रमण की रफ्तार थमने लगी है। इस समय कोरोना संक्रमण के कुछ सक्रिय मामले 56 ही बचे हैं जिसमें 21 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। लेबल वन के 2 मरीज जिले के एक निजी अस्पताल में, लेवल टू के 2 मरीज सरकारी अस्पताल में, 2 निजी अस्पताल में तथा 6 मरीज लखनऊ में भर्ती हैं। जबकि लेवल थ्री के नौ मरीज लखनऊ में केजीएमयू, लोहिया अस्पताल व विवेकानंद अस्पताल मिलाकर भर्ती हैं।
जिला कोरोना मुक्त संक्रमण की ओर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। भले ही अभी जिले में एक्टिव मामले आ रहे है, लेकिन जिले के कोविड अस्पताल मरीजों से लगभग मुक्त हो गए हैं। गंभीर मरीजों के लिए जिले के कोविड अस्पतालों के बेड लगभग खाली हो गए हैं।
इन अस्पतालों में सिर्फ छह मरीज भर्ती है। जिले में बचे संक्रमित मरीजों में हल्के लक्षण हैं। इसी वजह से होम आइसोलेट कर दिया गया है। जिले में केवल 56 सक्रिय मामले बचे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है, जल्द ही जिला संक्रमण को हराकर अपनी पटरी पर लौट आएगा।
कोरोना की दूसरी लहर ने हम सभी को परेशान करके रख दिया था। मौतों की बढ़ती तादाद सैकड़ों में पॉजिटिव होते लोग हर कोई को विचलित कर रहा था। अप्रैल व मई माह के दिन शायद ऐसा कोई हो, जो अपनी जिंदगी में याद न रखे। अपने को बचाने के लिए जद्दोजहद जारी रहती थी।
अप्रैल व मई माह में कोविड अस्पतालों में एक-एक बेड की मारामारी मची थी। चाहे ऑक्सीजन की बात हो या बेड हासिल करने की, छोटे से लेकर बड़े अफसरों की सिफारिशें किया करते थे। लेकिन अब जिला कोरोना मुक्ति की ओर बढ़ने लगा है।