गोंडा। संजय सेतु की प्रस्तावित मरम्मत के दौरान वैकल्पिक आवागमन के लिए पीपे के पुल का संशोधित प्रस्ताव अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) मुख्यालय में विचाराधीन है। लोक निर्माण विभाग ने 8.26 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव भेजा है। एनएचएआई की सहमति मिलते ही अस्थायी पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
संजय सेतु की मरम्मत को लेकर चल रही हलचल अब बजट की रस्साकशी में उलझ गई है। 42 साल पुराने इस पुल पर मरम्मत जरूरी है, लेकिन असली पेंच मरम्मत से ज्यादा उस दौरान होने वाले वैकल्पिक इंतजाम पर फंसा है। दरअसल, मरम्मत का प्रस्ताव एनएचएआई ने तैयार किया। योजना थी कि 10 फरवरी से काम शुरू करके पुल पर आवागमन रोक दिया जाए। मगर संजय सेतु से आवागमन बंद होने से परेशानी के मद्देनजर विरोध शुरू हो गया। गोंडा-लखनऊ मार्ग पर संजय सेतु मंडल की लाइफलाइन है। गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती ही नहीं, नेपाल से आने-जाने वाले लोगों का भी यही प्रमुख रास्ता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर सबसे बड़ा मुद्दा बना। अभी जहां मरीज दो घंटे में लखनऊ पहुंच जाते हैं, पुल बंद होने पर अयोध्या या बहराइच होकर लखनऊ जाने में तीन-चार घंटे लग सकते हैं। इसी समस्या को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद पीपे पुल का वैकल्पिक प्रस्ताव तैयार किया गया।
पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अखिलेश दिवाकर ने बताया कि दोबारा प्रस्ताव तैयार करके भेजा गया है। पहले और नए प्रस्ताव में क्या बदलाव किए गए हैं? के सवाल पर उन्होंने कन्नी काट ली। कहा कि स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा का कहना है कि दोबारा से प्रस्ताव मिला है। उसे मुख्यालय भेजा गया है। जो भी आदेश मिलेगा, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
इस वजह से लाैटी पहली फाइल
लोक निर्माण विभाग ने लगभग 500 मीटर लंबे डबल लेन पीपे के पुल के लिए 8.96 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था। सूत्र बताते हैं कि एनएचएआई ने इसे लागत अनुपात के आधार पर खारिज किया। तर्क दिया गया कि जब स्थायी पुल की मरम्मत ढाई करोड़ में हो रही है, तो अस्थायी पुल पर लगभग नौ करोड़ कैसे खर्च होंगे?। यहां असली सवाल था कि क्या वैकल्पिक व्यवस्था का खर्च मरम्मत लागत से ज्यादा होना तर्कसंगत है? एनएचएआई ने यही आपत्ति दर्ज की। इसके बाद अब लोक निर्माण विभाग ने नए सिरे से प्रस्ताव बनाया। इसमें 70 लाख रुपये की कटौती की गई। पीडब्ल्यूडी ने लागत घटाकर 8.26 करोड़ रुपये कर दी। अंदरखाने चर्चा है कि डिजाइन, सामग्री और कुछ मदों में कटौती कर अनुमान कम किया गया। अब फाइल एनएचएआई मुख्यालय में दोबारा विचाराधीन है।