गोंडा। अवध धाम की चौरासी कोसी परिक्रमा महंत गयादास महाराज के नेतृत्व में पसका सूकरखेत में गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरिदास आश्रम पहुंची। जहां साधु-संतों ने त्रिमुहानी घाट पर सरयू में डुबकी लगाकर भगवान वाराह मंदिर में मत्था टेका। परिक्रमा का दूसरा जत्था रविवार को सेमरा में रात्रि विश्राम के बाद सोमवार को उमरीबेगमगंज के वाराही देवी मंदिर के लिए प्रस्थान करेगा।
परिक्रमा शनिवार को गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान राजापुर से चलकर रामसुमिरन दास कुटी पहुंचा। जहां लोगों ने सेवा व स्वागत किया। परिक्रमा दोपहर में तुलसीदास के गुरु नरहरिदास के आश्रम पहुंची। जहां महंत बाबा तुलसीदास, बाबा सूर्यमणिदास, अनिल कुमार शर्मा, सुभाष चंद्र पांडेय, घनश्याम शुक्ल, साधु शरण पाठक, वेदप्रकाश तिवारी आदि ने साधु-संतों का फूल-माला से स्वागत किया। दोपहर में भंडारे में संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। जहां से वृंदावन खैरा पुरवियन पुरवा में रात्रि विश्राम के लिए तीसरा पड़ाव डाला। रविवार को परिक्रमा सकरौर, तिवारीगंज पहुंची जहां स्वागत किया गया। इसी दिन परिक्रमा उमरीबेगमगंज पहुंच गई। बखरिहा में दोपहर में विश्राम व सेमरा में रात्रि विश्राम के लिए चौथा पड़ाव डाला।
गुरु नरहरिदास आश्रम में गोस्वामी जी द्वारा हस्तलिखित श्रीरामचरितमानस के पन्नों के दर्शन कर साधु-संत भावविभोर हो उठे। संत घंटों तक मानस के पन्ने निहारते रहे। तमाम साधु-संत पुलिस व प्रशासन के लोग भी मानस के पन्नों की अपने मोबाइल से फोटो खींचने लगे। संतों ने कहा उनकी परिक्रमा फलीभूत हो गई।
चिलचिलाती धूप व भीषण गर्मी से आहत धर्मार्थ सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत गयादास ने परिक्रमा पड़ाव स्थलों पर हैंडपंप, प्रकाश व छाया (पौधरोपण) कराने की मांग की। उन्होंने कहा एक वर्ष पूर्व उन्होंने पसका पुल पर संतों के साथ धरना-प्रदर्शन कर सरयू-घाघरा संगम को बहाल करने व स्नान घाट पर शवों का दाह संस्कार बंद करने के लिए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया था। मगर अभी तक मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।