करनैलगंज (गोंडा)। एल्गिन-चरसड़ी बांध के निर्माण के पहले से एक ऐसी ग्राम पंचायत है, जो लगातार बाढ़ से प्रभावित रहती है। यहां के ग्रामीणों का कोई पुरसाहाल नहीं है। दो जिलों गोंडा और बाराबंकी की सीमा पर बसे ग्राम माझा रायपुर की दुश्वारियां 20 वर्षों से दूर नहीं हो रही हैं।
वर्ष 2006-07 में जब एल्गिन चरसड़ी बांध का निर्माण शुरू हुआ तो यह ग्राम पंचायत बांध के बाहर कर दी गई। इसका कुछ हिस्सा नदी के अंदर रह गया। मगर जब ग्राम परसावल के पास वर्ष 2009 में बांध कट गया, उसके बाद वहां दूसरा रिंग बांध बनाया गया। तब यह ग्राम पंचायत पूरी तरह बांध के अंदर और नदी के मुहाने पर आ गई। बाढ़ की शुरुआत होते ही पूरी ग्राम पंचायत पानी से लबालब हो जाती है और यहां के निवासी बांध पर अपना आशियाना बना लेते हैं।
गांव के ही तिलकराम, राम बुझावन, सहदेव, इंद्रेश कुमार, शिवबरन, रामनरेश यादव आदि का कहना है कि लिखापढ़ी में यह ग्राम पंचायत बाराबंकी जिले की है जो बांध के भीतर है। बाढ़ आती है चली जाती है मगर बाढ़ पीड़ितों को किसी प्रकार की कोई सहायता प्रशासन नहीं मुहैया करा पाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि गरीब 10 वर्ष पहले बाराबंकी जिले की पांच ग्राम पंचायत मांझा रायपुर, परसावल, बेहटा, बांसगांव, पारा को गोंडा में शामिल करने की घोषणा की गई थी। न तो यह गोंडा में शामिल हुई हैं और न ही बाराबंकी प्रशासन ग्रामीणों की समस्याओं पर अमल करता है। जबकि जुलाई से लेकर तीन माह तक पूरे गांव में करीब आठ फीट ऊंचाई में पानी भरा रहता है। ग्रामीण तीन महीना तक बांध से होकर जरवल, करनैलगंज, परसपुर आदि स्थानों से खरीदारी करते हैं। बाराबंकी से सीधा संपर्क कटा रहता है।
प्रभारी तहसीलदार अनु सिंह का कहना है कि मांझा रायपुर गांव करनैलगंज तहसील में नहीं है। वहां के बाढ़ पीड़ित यदि तहसील क्षेत्र में शरण लेते हैं तो उन्हें भी राशन किट आदि उपलब्ध कराई जाती है। बाकी यह बाराबंकी जिले का गांव है यहां से कोई सहायता नहीं दी जा सकती है।