गोंडा समेत फैजाबाद, बाराबंकी, बलरामपुर सहित आसपास के कई जिलों से लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा बुधवार से पसका में शुरू हो जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले पसका संगम मेले का मुख्य स्नान पर्व गुरुवार को होगा। घाघरा-सरयू के तट त्रिमुहानीघाट पर पौष पूर्णिमा की 12 जनवरी को मुख्य स्नान होगा। तीन दिनों तक गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली तथा गुरुभूमि पर राष्ट्रीय रामायण मेला व कवि सम्मेलन के साथ गोष्ठी परिचर्चा आदि कार्यक्रम भी होंगे।
जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर स्थित पसका सूकरखेत में हर साल पौष पूर्णिमा पर मेला लगता है। पौष कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर पूरे एक माह पूर्णिमा तक कल्पवास चलता है। मुख्य स्नान के बाद इसका समापन होता है। पूस का महीना लगते ही श्रद्धालु त्रिमुहानी घाट पर फूस की कुटिया डाल कर एक माह तक कल्पवास करते है।
तीन दिवसीय मेले को लेकर हर साल ही यहां आसपास के क्षेत्रों व दूसरे जनपदों से आए कलाकार, जादूगर, सर्कस, नाटक आदि प्रस्तुत करते हैं। होटल खानपान की वस्तुओं आदि की दुकानें सजती हैं।
नोकामना पूरी होने पर यहां लोग भगवत भजन, अखंड रामायण पाठ, श्रीमद्भागवत कथा और भंडारे का भी आयोजन करते हैं, जिसे लेकर लोगों में खासा उत्साह है। वहीं गुरुवार को पड़ रहे स्नान में यहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी।
पसका सूकरखेत मेले के मद्देनजर दो दिवसीय 34वें राष्ट्रीय रामायण मेले का आयोजन बुधवार से हो जाएगा। इस रामायण मेले में रामचरित मानस पाठ, श्री सीताराम नाम संकीर्तन व भजन होंगे। यह मेला दो दिनों तक चलेगा। मेले में कवि, साहित्यकार, संत महात्मा तथा साहित्यकारों को आमंत्रित किया गया है, जो रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर प्रकाश डालेंगे।
कुछ इस तरह होंगे कार्यक्रम
-11 से 13 जनवरी तक रोजाना शाम 3 से 6 बजे तक कथा प्रवचन।
-11 जनवरी की शाम 6 से 7 बजे तक धर्म का सामाजिक सरोकार विषय पर संगोष्ठी।
.-11 जनवरी की सायं सात बजे से कवि सम्मेलन व मुशायरा।
-12 जनवरी को दोपहर 12 से 2 बजे तक पर्यावरण संरक्षण में जन सहभागिता को लेकर गोष्ठी।
-12 जनवरी की शाम 6 से 8 बजे तक लोकगीत, जादू तथा नाटक का कार्यक्रम।
-12 जनवरी की रात 8 बजे से बिरहा का कार्यक्रम।
-13 जनवरी को रामायण मेला।