पसका। भाद्रपद अमावस्या (भदई गंगा) पर शुक्रवार को श्रीरामजानकी घाट पर श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य किया। स्नान के बाद श्रीरामजानकी मंदिर में दर्शन-पूजन कर प्रसाद चढ़ाया। सुबह बारिश के कारण श्रद्धालुओं की संख्या कम रही, लेकिन मौसम साफ होने के बाद चहल-पहल बढ़ गई। श्रद्धालु रामकिशोर, रामनाथ, पवन और रमेश ने बताया कि भाद्रपद अमावस्या के स्नान का विशेष महत्व है। मंदिर के पुजारी बाबा गोकर्णदास महाराज ने बताया कि पवित्र नदियों में स्नान, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इससे आध्यात्मिक शांति मिलती है। (संवाद)
भागवत कथा से पूर्व हुई कलश स्थापना
पसका। भौरीगंज के सरयू तट स्थित श्रीरामजानकी मंदिर परिसर में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व कलश स्थापना और धार्मिक अनुष्ठान हुए। मंदिर के पुजारी बाबा गोकर्णदास महाराज ने बताया कि 11 से 17 सितंबर तक प्रवाचक पं. राजन जी महाराज श्रीमद्भागवत कथा सुनाएंगे। कथा में भगवान की लीलाओं का वर्णन किया जाएगा। 18 सितंबर को पूर्णाहुति पर हवन-पूजन के बाद भंडारा होगा। उन्होंने लोगों से कथा में शामिल होने की अपील की। (संवाद)
22 अक्तूबर से शुरू होगा रामलीला महोत्सव
नवाबगंज। कटरा शिवदयालगंज की करीब सात दशक पुरानी श्री अवध रामलीला समिति का 12 दिवसीय रामलीला महोत्सव 22 अक्तूबर से शुरू होगा। आयोजन के लिए स्थानीय कलाकारों का चयन कर रिहर्सल शुरू कर दिया गया है।
समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने बृहस्पतिवार शाम आयोजित बैठक में बताया कि वर्ष 1958 में शुरू हुई यह रामलीला क्षेत्र की प्राचीन रामलीलाओं में शामिल है। अवधी लोककला पर आधारित इस आयोजन में भगवान श्रीराम के आदर्शों समेत राम जन्म, राजा हरिश्चंद्र, नारद मोह, भक्त श्रवण कुमार और लवकुश प्रसंग का मंचन किया जाता है। रजनीश कमलापुरी व त्रेतानाथ गुप्ता ने बताया कि पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।
विनोद कुमार गुप्त ने बताया कि रामलीला में अभिनय करने वाले ज्यादातर कलाकार स्थानीय हैं, जो विभिन्न व्यवसायों से जुड़े हैं। रामलीला के मंच से अभिनय की शुरुआत करने वाले कई कलाकार आज प्रदेश के विभिन्न जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं।
मांस-मछली की दुकानें बंद कराने की मांग
बालपुर। कजरी तीज मेले के दौरान कस्बे में मांस-मछली की दुकानों को अस्थायी रूप से बंद कराने की मांग उठी है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बड़ी संख्या में कांवड़िये सरयू घाट कटरा से जल लेकर दुखहरण नाथ मंदिर में जलाभिषेक करने जाते हैं। धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मेले तक दुकानें बंद रखी जाएं। मदन तिवारी, अंकित शुक्ल, अखिलेश गुप्त आदि ने जिलाधिकारी से इस संबंध में निर्देश जारी करने की मांग की है। (संवाद)
भाद्रपद अमावस्या पर सरयू नदी में स्नान करते श्रद्धालु। - संवाद