गोंडा। आकांक्षी ब्लॉक रुपईडीह में करोड़ों रुपये के घोटाले की परतें खुलने के बाद अब 243 स्वयं सहायता समूहों का ब्योरा प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) पर अपलोड न होने को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि समूहों के नाम पर रकम ट्रांसफर होने के बावजूद भारत सरकार के पोर्टल पर इनका ब्योरा दर्ज ही नहीं किया गया। घोटाले की जांच रिपोर्ट सीडीओ को सौंपते ही एनआरएलएम से जुड़े अधिकारियों में खलबली मची हुई है।
12 नवंबर को डीसी एनआरएलएम तथा स्व रोजगार विभाग के जेएन राव ने रुपईडीह ब्लॉक के मिशन प्रबंधकों और कर्मचारियों से इसको लेकर स्पष्टीकरण तलब किया था। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2021-22 से अब तक कुल 683 समूहों के सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) की धनराशि अंतरित की जा चुकी है, लेकिन इनमें से सिर्फ 440 समूहों का ब्योरा ही पोर्टल पर दर्ज है। शेष 243 समूहों का ब्योरा अब तक दर्ज नहीं किया गया है, जबकि अधिकारियों को कई बार निर्देश दिए जा चुके थे। कर्मचारियों को इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
ब्लॉक कर्मियों का कहना है कि सीडीओ को जांच रिपोर्ट सौंपे जाने से अफसर घबराए हैं। संलिप्तता उजागर होने के डर से अब कर्मचारियों पर एमआईएस पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जबकि वर्षों पुराने इस घोटाले में निजी लाभ उठाने वाले अधिकारी अभी भी सुरक्षित हैं। आरोप है कि ब्लॉक मिशन प्रबंधक कुलदीप तिवारी की सेवा समाप्त होने के बाद अब एक-एक समूह का एमआईएस अपडेट किया जा रहा है, जबकि निजी लाभ लेने वाले कुछ अधिकारी अब अन्य ब्लॉकों में सेवाएं दे रहे हैं। कई अन्य अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।