गोंडा। बिजली नेटवर्क सुधारने के नाम पर 455 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन जिले में करंट अब भी जुगाड़ के भरोसे दौड़ रहा है। कहीं हाईटेंशन लाइन पेड़ से टकरा रही है तो कही डाल में इंसुलेटर बांधकर स्पार्किंग रोकने की कोशिश की जा रही है। कई जगह तो खंभों की जगह बांस-बल्ली के सहारे बिजली के तार खींचे गए हैं। आबादी और सड़क किनारे खुले ट्रांसफार्मर तथा बारिश में झुके हाईटेंशन पोल हादसों को न्योता दे रहे हैं।
तरबगंज फीडर के धौरहराघाट में नारायण पब्लिक स्कूल के पास हाईटेंशन लाइन अर्जुन के पेड़ से टकरा रही है। स्पार्किंग से डाल झुलस चुकी है। लाइन सुरक्षित करने के लिए डाल काटने के बजाय उसी में इंसुलेटर बांध दिया गया है। बारिश और तेज हवा में अब भी चिंगारियां निकल रही हैं। हाईवे और स्कूल के पास यह लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है।
इटियाथोक कस्बे में जर्जर केबल और बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। नवाबगंज में पहलवानवीर मंदिर के पास सड़क किनारे खुला ट्रांसफार्मर खतरा बना है। दो दिन पहले इसकी चपेट में आने से एक बिल्ली की मौत हो गई थी। मनकापुर के गायत्रीनगर में ट्रांसफार्मर झाड़ियों से घिरा है। रफीनगर और धानेपुर में भी खुले ट्रांसफार्मर आबादी के लिए खतरा बने हैं। यह हाल तब है, जब देवीपाटन जोन में आरडीएसएस के तहत 434 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। बिजनेस प्लान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 21.51 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में भी 66.43 करोड़ रुपये से काम कराए जा रहे हैं।
चार मौतें, फिर भी सबक नहीं
सोमवार को धानेपुर विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र के विशंभरपुर के पास नौव्वागांव निवासी इस्लाम अली (65) की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। इससे पहले शनिवार को चकसड़ बरईपुरवा में करंट से प्रदीप कुमार सोनकर की जान चली गई थी। 30 जून को स्ट्रीट लाइट के खंभे में करंट उतरने से विजय कुमार और 10 अप्रैल को जर्जर तार टूटकर गिरने से पत्रकार रंजीत तिवारी की मौत हो गई थी। लगातार हादसों के बावजूद इसकी रोकथाम को लेकर जिम्मेदार उदासीन बने हैं।
बारिश में हादसों का खतरा बढ़ जाता है। सभी एक्सईएन, एसडीओ और जेई को जरूरी निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ताओं की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुशील कुमार यादव, अधीक्षण अभियंता